आयुष्मान योजना में गड़बड़ी की शिकायतों पर छत्तीसगढ़ के 17 निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की जांच

छत्तीसगढ़ में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से फर्जी उपचार और डमी मरीजों के नाम पर क्लेम राशि आहरित करने की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित 17 निजी अस्पतालों को चिन्हित करते हुए उनके मेडिकल और क्लेम दस्तावेजों की सघन जांच की है।
कार्रवाई को गोपनीय रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 52 अधिकारियों को शामिल करते हुए 17 अलग-अलग टीमें गठित की थीं। जांच में शामिल अधिकारियों को निरीक्षण वाले दिन सुबह लगभग 10 बजे ही उनके आवंटित शहर और अस्पताल की जानकारी दी गई। इस निरीक्षण के दायरे में रायपुर के 7, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2, तथा कोरबा, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम और कोंडागांव का 1-1 निजी अस्पताल शामिल रहा।
दलों की पड़ताल में अस्पतालों में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। कुछ केंद्रों में आईसीयू में भर्ती बताए गए मरीजों से जुड़े जरूरी दस्तावेज और फाइलें मौके पर नदारद मिलीं। कई जगह सामान्य दर्द जैसी मामूली तकलीफ वाले मरीजों को भी बेड पर भर्ती दिखाया गया था, जिन्हें भर्ती करने की चिकित्सकीय आवश्यकता नहीं थी। पड़ताल के दौरान वरदान अस्पताल में 28 सितंबर की सुबह कम समय के अंतराल में ही 19 मरीजों को छुट्टी देने का मामला सामने आया, जिनमें 18 ओडिशा और एक महासमुंद का था। इसी अस्पताल में 30 सितंबर को कुल 20 भर्ती मरीजों में से आयुष्मान के केवल 7 मरीज मिले।
जांच रिपोर्ट के आधार पर मेडिलाइफ सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन निरस्त करने और प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मरीजों से अतिरिक्त राशि वसूलने की पुष्टि होने पर लोटस हॉस्पिटल एंड एडवांस यूरोलॉजी सेंटर को अगले आदेश तक योजना से डी-एम्पैनल कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त संचालक इंद्रजीत बर्मन के अनुसार, अधिक शिकायतों वाले अस्पतालों पर प्रारंभिक दंडात्मक कदम उठाए जा चुके हैं। शेष चिन्हित संस्थानों के दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।