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छत्तीसगढ़ में कम गंभीर नक्सल मामलों की कानूनी पड़ताल के आदेश, गैर-घातक प्रकरणों की वापसी पर विचार

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Raunak005 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ शासन ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े कम गंभीर मामलों में न्यायिक पड़ताल कराने का निर्णय लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन मामलों में जेल में बंद लोगों की रिहाई की संभावना तलाशना है, जिनमें कोई जनहानि नहीं हुई है। विधि सम्मत जांच के उपरांत पात्र पाए जाने वाले मुकदमों को वापस लेने की औपचारिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने पुलिस विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राहत, पुनर्वास और स्थानीय विकास कार्यों को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए। शासन की योजना के तहत विधि विभाग के समन्वय से अभियोजन अधिकारियों और सरकारी वकीलों की एक विशेष टीम तैयार की जाएगी। यह कानूनी दल संबंधित मुकदमों की बारीकी से जांच कर प्रकरण वापसी की पात्रता तय करेगा।

अधिकारियों के अनुसार इन कानूनी प्रक्रियाओं में हो रही प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित होंगी। इसके साथ ही विचाराधीन बंदियों को आवश्यक वैधानिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

शासन ने पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे अंचलों में निर्माण कार्यों को गति देने के लिए वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। जिन ग्रामों ने स्वयं को नक्सली प्रभाव से पूरी तरह मुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया है, उनमें से प्रत्येक गांव को एक करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की मंजूरी दी जाएगी। वर्तमान में ऐसे पचास गांवों को चिह्नित किया गया है। इनमें सुकमा और बीजापुर ज़िलों के बीस-बीस गांव तथा नारायणपुर ज़िले के दस गांव शामिल हैं।

समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि आगामी पंद्रह अगस्त के अवसर पर सभी नक्सल मुक्त घोषित गांवों में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जाए। आधिकारिक बयान के अनुसार इस नीति का लक्ष्य कम गंभीर आरोपों के तहत बंद व्यक्तियों को राहत पहुंचाना और प्रभावित क्षेत्रों में अधोसंरचना व प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करना है।

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