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छत्तीसगढ़ में बस यात्रा का नया किराया ढांचा लागू, परिवहन विभाग ने जारी की अधिसूचना

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: news18.com

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों के सफर के लिए परिवहन विभाग ने पुनरीक्षित किराया तालिका अधिसूचित कर दी है। विभागीय आदेश के अनुसार साधारण बस सेवा में शुरुआती 5 किलोमीटर के सफर का भाड़ा 10 रुपए तय किया गया है। इसके बाद यात्रियों को 1.75 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करना होगा। सुपर लग्जरी वातानुकूलित श्रेणी की गाड़ियों में पहले 5 किलोमीटर का किराया 12 रुपए रहेगा और आगे का सफर 3.30 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से जुड़ेगा। यही शुल्क शयनयान और अर्द्ध-शयनयान वातानुकूलित बसों पर भी समान रूप से प्रभावी होगा।

प्रशासनिक निर्देश के तहत डीलक्स श्रेणी की रात्रिकालीन सेवाओं के लिए 2.20 रुपए प्रति किलोमीटर का स्लैब तय हुआ है। इसके अलावा सामान्य दर्जे की रात्रि बस सेवाओं में साधारण दर के मुकाबले 10 फीसदी अतिरिक्त किराया लिया जाएगा। यह अधिसूचना छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ की ओर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन आंदोलन और उनकी मांगों पर शासन स्तर पर हुए विचार-विमर्श के बाद सामने आई है। महासंघ ने पूर्व में नौ मांगों को लेकर हड़ताल की चेतावनी दी थी। इसके पश्चात परिवहन मंत्री केदार कश्यप और आला अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में सहमति बनने पर आंदोलन वापस लिया गया था।

यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली के अनुसार, ईंधन और गाड़ियों के संचालन खर्च में बढ़ोतरी के कारण बस मालिक पिछले चार महीनों से दरें संशोधित करने की मांग उठा रहे थे। उन्होंने यह भी बताया था कि लगभग तीन वर्षों से विभागीय अफसरों के साथ उनकी बैठक नहीं हुई थी। किराए में बढ़ोतरी के अलावा महासंघ ने सिंगल स्लीपर सीट पर सिंगल टैक्स लगाने, ई-बसों का परिचालन शहरी सीमा तक सीमित रखने और ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली गाड़ियों को ग्रामीण इलाकों तथा बस अड्डों से चलाने पर रोक लगाने की मांग की थी। साथ ही स्टेज कैरिज के समयचक्र में उचित अंतराल, वीएलटीडी डिवाइस नवीनीकरण शुल्क घटाने, मैनुअल फिटनेस सुविधा, ऑनलाइन परमिट व्यवस्था और अन्य ज़िलों अथवा राज्यों के लिए परमिट नवीनीकरण प्रक्रिया सरल करने का आग्रह किया गया था।

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस प्रशासनिक फैसले की आलोचना की है। पार्टी प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि इस निर्णय से नागरिकों पर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेट्रोल के दाम घटाकर आम जनता और बस संचालकों दोनों को राहत देनी चाहिए थी।

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