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छत्तीसगढ़ में मॉनसून ब्रेक और बढ़ते तापमान से धान की फसल प्रभावित, सूरजपुर में बारिश की आस

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Yann / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्रों में वर्षा की सुस्ती ने धान उत्पादकों के समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न कर दी है। खेतों में पर्याप्त पानी न होने तथा शुष्क मौसमी परिस्थितियों के कारण फसलें पीली दिखने लगी हैं। मॉनसून में आए इस व्यवधान से फसलों की वृद्धि पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे काश्तकारों की मुश्किलें निरंतर बढ़ रही हैं।

प्राप्त मौसम संबंधी जानकारियों के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में मॉनसून ब्रेक की स्थिति साफ नजर आ रही है। बादलों की अनुपस्थिति और तापमान में हुई बढ़ोतरी के चलते खेतों में नमी की भारी कमी दर्ज की जा रही है। बारिश न होने से फसलों को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका बनी हुई है। मौसम की इस बेरुखी के बीच कृषक समुदाय अब आगामी बारिश के संकेतों की टकटकी लगाए प्रतीक्षा कर रहा है।

सूरजपुर ज़िले के ग्रामीण अंचलों में लगातार बढ़ते तापमान और बादलों की बेरुखी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। मौसमी जल पर आश्रित रहने वाले काश्तकारों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बारिश की तीव्र आवश्यकता को देखते हुए सूरजपुर के ग्रामीणों ने वर्षा की कामना के साथ लोक-परंपरा के अनुसार मेंढक और मेंढकी के विवाह का आयोजन भी संपन्न कराया है।

वर्षा की अनिश्चितता और खेतों में सूखती फसलों के कारण कृषक वर्ग की चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ फसलों के सूखने का जोखिम गहराता जा रहा है। यदि फसलों को समय रहते पानी नहीं मिलता, तो उत्पादन प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। उधर, मौसम विज्ञान विभाग द्वारा मानसून की संभावित गतिविधियों तथा उसकी विदाई से जुड़े जारी अलर्ट और पूर्वानुमानों को लेकर भी किसान सतर्क बने हुए हैं।

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