छत्तीसगढ़ में 1959 से पहले आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए सर्वेक्षण शुरू

छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों में आबादी भूमि पर काबिज नागरिकों को मालिकाना हक प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ करा दिया है। शासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य नगरों और कस्बों में आबादी मद की जमीन पर बसे नागरिकों को उनकी काबिज भूमि पर विधिक स्वामित्व का अधिकार दिलाना है। इस संबंध में राज्य स्तर पर नगरीय क्षेत्रों में जमीन के सर्वेक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, वर्ष 1959 से पूर्व आबादी मद में दर्ज भूमि पर काबिज नागरिकों को इस व्यवस्था के तहत मालिकाना हक दिया जाना है। वर्ष 1959 के पहले से आबादी क्षेत्र के दायरे में दर्ज भूखंडों पर बसे लोगों को ध्यान में रखते हुए यह सर्वेक्षण कराया जा रहा है। शासन द्वारा शहरी जमीन पर काबिज लोगों को उनका मालिकाना हक देने के लिए यह सर्वे शुरू कराया गया है।
शासन के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में आबादी भूमि पर लंबे समय से काबिज लोगों को विधिक अधिकार उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। 1959 के पूर्व आबादी मद में चिन्हित स्थलों पर निवासरत नागरिकों की स्थिति को देखते हुए यह पहल की गई है। इस सर्वेक्षण के माध्यम से 1959 से पहले की आबादी भूमि पर काबिज नागरिकों को मालिकाना हक सौंपने की तैयारी की जा रही है।
राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि नगरीय जमीन पर बसे लोगों को कानूनी स्वामित्व का अधिकार देने के लिए सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया जा चुका है। वर्ष 1959 से पहले आबादी में दर्ज भूमि के संबंध में काबिज नागरिकों को मालिकाना हक देने के उद्देश्य से यह पहल की गई है, जिससे शहरी क्षेत्रों में काबिज लोगों को उनकी जमीन का अधिकार मिल सके।
शहरी क्षेत्रों में आबादी मद की भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक दिए जाने के इस कदम के तहत वर्ष 1959 के पूर्व की आबादी भूमि पर काबिज नागरिकों को ध्यान में रखा गया है। शासन द्वारा सर्वेक्षण शुरू कराए जाने के बाद अब 1959 के पहले से आबादी जमीन पर काबिज व्यक्तियों को मालिकाना हक दिए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।