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शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियुक्ति मामला: स्वास्थ्य सचिव और सीजी-पीएससी को अदालत की अवमानना का नोटिस

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Gajanan Jagannath Jagdale / Wikimedia Commons (CC0)

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की युगलपीठ ने सरकारी नर्सिंग महाविद्यालयों में पुरुष उम्मीदवारों को अवसर न देने के मामले में जवाबदेही तय की है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस थमाते हुए पाँच सप्ताह में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

इस कानूनी विवाद की शुरुआत 8 दिसंबर 2021 को जारी विज्ञापन से हुई थी। उस समय लोक सेवा आयोग ने शासकीय नर्सिंग महाविद्यालयों में डिमॉन्स्ट्रेटर तथा असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती निकाली थी। इस चयन प्रक्रिया में केवल महिला अभ्यर्थियों को ही योग्य ठहराया गया था। इस व्यवस्था के विरोध में प्रभावित उम्मीदवारों ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी।

अदालत ने वर्ष 2023 में अहम फैसला सुनाते हुए इन संस्थानों में शत-प्रतिशत महिला आरक्षण के प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। पीठ ने उस व्यवस्था को निरस्त कर पुरुष अभ्यर्थियों को भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनाने का स्पष्ट आदेश दिया था। न्यायिक निर्देश के अनुसार नियमों में बदलाव कर नियमित पदों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पूर्व आदेश के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी नियमों में सुधार कर स्थायी नियुक्ति आरंभ नहीं की गई। इसके विपरीत, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने 22 जून 2026 को संविदा आधार पर नई भर्ती की अधिसूचना प्रकाशित कर दी। इस विज्ञापन में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डिमॉन्स्ट्रेटर के पदों पर अस्थायी आवेदन मँगाए गए।

प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि नियमित भर्ती के बजाय संविदा का रास्ता चुनकर पुरुष उम्मीदवारों को पुनः शैक्षिक पदों से वंचित रखा गया। अदालती फैसले की खुली अवहेलना का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका पेश की। अब उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को तलब कर पाँच सप्ताह की मियाद में जवाब दाखिल करने का हुक्म दिया है।

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