शासकीय शालाओं में धार्मिक प्रार्थना और मंत्रोच्चार की अनिवार्यता पर उच्च न्यायालय की रोक, दबाव डालने पर कार्रवाई की चेतावनी

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को हिंदू धार्मिक प्रार्थनाओं अथवा मंत्रों के पाठ के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने ‘अब्दुल सलाम रिजवी एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के संदर्भ में 12 जून को एक आदेश प्रसारित किया था। इस निर्देश के तहत सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रतिदिन तीन बार धार्मिक गतिविधियाँ तय की गई थीं। सुबह की प्रार्थना सभा में सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र, गुरु मंत्र तथा दीप मंत्र का पाठ निर्धारित था। इसके अतिरिक्त दोपहर में मध्याह्न भोजन के समय भोजन मंत्र और शाला की छुट्टी से पहले शांति मंत्र का गायन अनिवार्य किया गया था।
इस व्यवस्था के विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलाम रिजवी, अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र छाबड़ा और सामाजिक कार्यकर्ता शफीक अहमद ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आमिर खान और सितारा खान ने दलील दी कि सरकारी संस्थानों में किसी एक मत से जुड़े अनुष्ठान थोपना संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप तथा विद्यार्थियों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने यह पक्ष भी रखा कि आदेश में असहमति रखने वाले छात्रों के लिए अलग रहने का कोई प्रावधान नहीं था, जो तटस्थता और समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने पीठ को आश्वस्त किया कि 12 जून को जारी किए गए इस परिपत्र को अब तक स्कूलों में क्रियान्वित नहीं किया गया है। शासन के इस कथन को रिकॉर्ड पर लेते हुए उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी कि यदि आगामी समय में किसी भी छात्र पर मंत्रोच्चार या प्रार्थना के लिए अनुचित दबाव बनाया जाता है, तो वे सीधे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। पीठ ने चेतावनी दी कि ऐसा मामला सामने आने पर यथोचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रशासनिक निर्देश पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई थीं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कदम को संघ परिवार की विचारधारा करार दिया। वहीं कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने स्कूलों में सर्वधर्म समभाव का हवाला देते हुए फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी, जिसके जवाब में भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने गायत्री मंत्र को विश्व कल्याण का संदेशवाहक बताया था।