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सिरपुर यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल, विस्तृत नामांकन के लिए मिला एक वर्ष का समय

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: ibc24.in

छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले में महानदी के पूर्वी तट पर बसे प्राचीन पुरातात्विक स्थल सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर संबंधी संभावित सूची में दर्ज कर लिया गया है। इस कदम के बाद अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अंतिम मूल्यांकन के लिए विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार करने हेतु एक वर्ष की अवधि मिली है। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धम्मशील गणवीर ने इस निर्णय की पुष्टि की है।

एएसआई के रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् एम. कलिमुथु के अनुसार, प्राथमिक सूची में चयन के बाद अब विस्तृत कार्ययोजना बनाकर यूनेस्को को सौंपी जाएगी। पुरातत्व अधिकारियों का कहना है कि आगामी प्रपत्र में स्मारक क्षेत्र का बफर ज़ोन, संरक्षण संबंधी कार्ययोजना, प्रबंधन रूपरेखा, स्थल का उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य, प्रामाणिकता और अखंडता का विवरण दर्ज किया जाएगा। भारत में तकनीकी समीक्षा संपन्न होने के उपरांत यह दस्तावेज यूनेस्को की विशेष समिति को प्रेषित किया जाएगा। नामांकन की मजबूती के लिए जनभागीदारी व हितधारकों का परामर्श ज़रूरी रहेगा और अंतरराष्ट्रीय सलाहकार मिशन को भी निरीक्षण हेतु बुलाया जा सकता है।

सिरपुर प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात था और पांडुवंशी तथा बाद में सोमवंशी राजाओं के शासनकाल में दक्षिण कोसल की राजधानी रहा। यह देश के उन गिने-चुने प्राचीन नगरों में है जहाँ एक ही शहरी व्यवस्था में शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन धर्म के स्मारक साथ-साथ फले-फूले। यहाँ 22 शिव मंदिर, पाँच वैष्णव मंदिर, 10 बौद्ध विहार तथा तीन जैन विहार स्थापित हैं। इनमें ईंटों से निर्मित सातवीं शताब्दी का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर शामिल है, जिसका निर्माण रानी वासटा ने कराया था। इसके अतिरिक्त आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, तीवरदेव महाविहार, सुरंग टीला और गंधेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख संरचनाएँ हैं। सातवीं सदी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहाँ की बौद्ध परंपरा का उल्लेख किया था।

पुरातत्वीय उत्खनन में यहाँ दो हज़ार से अधिक प्राचीन अवशेष मिले हैं। इनमें धातु की प्रतिमाएँ, सिक्के, आभूषण निर्माण के उपकरण, बर्तन और खिलौने शामिल हैं, जो विभिन्न संग्रहालयों में संरक्षित हैं। राज्य शासन और पुरातत्व सर्वेक्षण अब इस साझा सांस्कृतिक धरोहर को औपचारिक स्वीकृति दिलाने की प्रशासनिक तैयारी में जुटे हैं।

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