सिरपुर यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल, वैश्विक धरोहर का पूर्ण दर्जा दिलाने के लिए शुरू हुई दस्तावेज़ी प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले में महानदी के पूर्वी तट पर स्थित ऐतिहासिक स्थल सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग दो घंटे के सफर पर मौजूद यह प्राचीन क्षेत्र विभिन्न धार्मिक परंपराओं के स्थापत्य के लिए पहचाना जाता है। इस सूची में स्थान मिलने के बाद इसे पूर्ण वैश्विक धरोहर का दर्जा दिलाने की आधिकारिक प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धम्मशील गणवीर के अनुसार, इस कदम से स्थल को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त होगी और स्थानीय पर्यटन का विस्तार होगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रायपुर सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् एम. कलिमुथु ने बताया कि यूनेस्को के समक्ष औपचारिक नामांकन प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए विभाग के पास अब एक वर्ष की अवधि शेष है। अधिकारियों के मुताबिक आगामी दस्तावेज़ में स्थल का उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य, प्रामाणिकता, अखंडता, प्रबंधन ढांचा, बफर ज़ोन तथा संरक्षण योजना स्पष्ट की जाएगी। भारत में तकनीकी समीक्षा और स्थानीय हितधारकों से चर्चा के उपरांत यूनेस्को, आईसीओएमओएस और आईयूसीएन के सलाहकार मिशन को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया जा सकेगा।
अतीत में श्रीपुर के नाम से विख्यात यह नगर पांडुवंशी और सोमवंशी राजाओं के काल में दक्षिणा कोसल की राजधानी रहा था। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहाँ का भ्रमण किया था। यह स्थल एक ही सुव्यवस्थित शहरी क्षेत्र में हिंदू, बौद्ध और जैन स्मारकों की मौजूदगी के लिए विख्यात है। यहाँ बाईस शिव मंदिर, पाँच वैष्णव मंदिर, दस बौद्ध विहार और तीन जैन विहार स्थित हैं। इनके अतिरिक्त आवासीय परिसर, बाज़ार, राजमहल, ध्यान कक्ष और प्राचीन जल प्रबंधन तंत्र के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।
लगभग 650 ईस्वी में पकी ईंटों से बना लक्ष्मण मंदिर यहाँ की प्रमुख संरचना है, जिसे पांडुवंशी शासक महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त के स्मरण में बनवाया था। परिसर में आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, तीवरदेव महाविहार, सुरंग टीला, प्राचीन राम मंदिर और गंधेश्वर महादेव मंदिर भी अवस्थित हैं। उत्खनन के दौरान यहाँ से दो हज़ार से अधिक पुरावशेष बरामद हुए हैं, जिनमें धातु की प्रतिमाएँ, औज़ार, बर्तन, सिक्के और खिलौने शामिल हैं। भगवान बुद्ध, अवलोकितेश्वर, तारा, ऋषभनाथ और भगवान विष्णु की धातु मूर्तियाँ देश के विभिन्न संग्रहालयों में सुरक्षित हैं।