सीएम हेल्पलाइन समीक्षा: पिपरिया तहसीलदार निलंबित, बिलासपुर में कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश

राज्य शासन ने जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतने पर कबीरधाम जिले के पिपरिया तहसीलदार प्रमोद कुमार चंद्रवंशी को फौरी तौर पर निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कबीरधाम जिला कार्यालय नियत किया गया है।
यह निर्णय नवा रायपुर स्थित सीबीडी भवन के सीएम हेल्पलाइन 1076 केंद्र में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों से संवाद स्थापित किया। बैठक में राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, नगरीय प्रशासन, पेयजल और बिजली से जुड़े प्रकरणों की सिलसिलेवार समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिकायतकर्ताओं से सीधे दूरभाष पर चर्चा कर जमीनी वस्तुस्थिति की जानकारी ली। पिपरिया क्षेत्र के ग्राम छबील पाली निवासी एक आवेदक ने बताया कि उन्होंने अप्रैल 2025 में जमीन सीमांकन हेतु आवेदन दिया था, मगर करीब डेढ़ वर्ष बीतने पर भी निराकरण नहीं हुआ। इस हीलाहवाली पर मुख्यमंत्री ने तहसीलदार को निलंबित करने का आदेश दिया।
इसके अतिरिक्त बिलासपुर जिले की पचपेड़ी तहसील के ग्राम कुकुलकाल निवासी व्यास नामक आवेदक ने अवगत कराया कि वर्ष 2023 में बंटवारा आदेश होने के बावजूद आठ में से एक खसरे में तकनीकी त्रुटि बताकर रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया गया। इस पर संबंधित तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। वहीं सक्ती जिले की एक उचित मूल्य दुकान में शक्कर का तय दर से अधिक मूल्य वसूलने की शिकायत पर अधिकारियों को ग्रामीणों से ली गई अतिरिक्त राशि वापस कराने का आदेश मिला।
समीक्षा में कुछ सकारात्मक प्रकरण भी सामने आए। गरियाबंद जिले के मैनपुर निवासी दमन साहू ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने से अस्सी से पचासी घरों की विद्युत आपूर्ति बाधित थी, जो शिकायत के सप्ताहभर में बहाल हो गई। जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक निवासी वीरेंद्र यादव ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री आवास योजना की 55 हजार रुपये की दूसरी किस्त दस दिनों में उनके खाते में आ गई।
अधिकारियों के अनुसार, सीएम हेल्पलाइन पर करीब तीन महीनों में 2 लाख 31 हजार शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 2 लाख का समाधान दर्शाया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि स्पेशल क्लोज्ड मामलों की औचक जांच कराई जाएगी ताकि केवल कागजी खानापूर्ति पर रोक लगे।