केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते में संशोधन का गणित और ऐतिहासिक रुझान

सार्वजनिक क्षेत्र और शासकीय सेवाओं में कार्यरत अमले के साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीवन स्तर को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की व्यवस्था लागू है। मीडिया रपटों के अनुसार सातवें वेतन आयोग के अंतर्गत आने वाले कर्मियों के लिए भत्ते में तीन से चार प्रतिशत की वृद्धि पर विचार किया जा सकता है। यह वित्तीय समायोजन देश में खुदरा मूल्य स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव की भरपाई के लिए किया जाता है।
प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार महंगाई भत्ते की दरों में वर्ष में दो बार संशोधन की व्यवस्था है। इसके तहत जनवरी और जुलाई माह में दरों की समीक्षा की जाती है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार मार्च 2023 में केंद्र सरकार ने चार प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिसे एक जनवरी 2023 से प्रभावी बनाया गया था। उस समायोजन के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़कर 42 प्रतिशत पर पहुँच गया था। इससे पहले सितंबर 2022 में भी चार प्रतिशत की वृद्धि लागू की गई थी, जिसका प्रभाव जुलाई 2022 से तय किया गया था।
आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार के अधीन 47.58 लाख सेवारत कर्मचारी और लगभग 69.76 लाख पेंशनभोगी आते हैं। शासकीय नियमों के तहत सेवारत कर्मचारियों को दिया जाने वाला लाभ महंगाई भत्ता कहलाता है, जबकि सेवानिवृत्त कर्मियों को मिलने वाली राशि को महंगाई राहत कहा जाता है। कर्मचारियों के मामले में यह गणना उनके मूल वेतन के आधार पर होती है, जबकि पेंशनरों के लिए इसका निर्धारण उनकी मूल पेंशन के आधार पर किया जाता है।
महंगाई भत्ते के निर्धारण के लिए एक विशिष्ट गणितीय सूत्र तय है। केंद्रीय कर्मियों के लिए यह व्यवस्था पिछले बारह महीनों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के औसत पर आधारित होती है, जिसमें से 115.76 घटाकर और फिर 115.76 से विभाजित कर सौ से गुणा किया जाता है। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत कर्मियों के लिए बीते तीन माह के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के औसत में से 126.33 घटाकर गणना की जाती है, जिसका आधार वर्ष 2001 को माना गया है।
वेतन संरचना में इस लाभ का अंतिम निर्धारण मूल वेतन और ग्रेड पे के कुल योग पर तय प्रतिशत लगाकर किया जाता है। कर्मचारियों के आवास क्षेत्र के आधार पर, चाहे वह नगरीय, अर्ध-नगरीय या ग्रामीण हो, यह दरें अलग-अलग रूप से प्रभावित हो सकती हैं। खुदरा महंगाई दर आम उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है, जिसके आधार पर प्रशासन कर्मचारियों के आर्थिक समायोजन का फैसला लेता है।