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छत्तीसगढ़ में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू, सामूहिक अवैध मतांतरण पर आजीवन कारावास की सजा

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Raunak005 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ में छल, प्रलोभन अथवा दबाव के जरिए कराए जाने वाले अवैध मतांतरण को रोकने के लिए नया कानून प्रभावी कर दिया गया है। शासन ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 की आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। यह नया विधान अविभाजित मध्य प्रदेश के समय से चले आ रहे 1968 के पुराने अधिनियम का स्थान लेता है। उप-मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार यह कानूनी व्यवस्था 10 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में लागू हो चुकी है। इस विधेयक को 19 मार्च 2026 को विधानसभा से पारित किया गया था, जिसके बाद 8 अप्रैल 2026 को राज्यपाल रमेन डेका ने इसे अपनी मंजूरी दी थी।

नए वैधानिक प्रावधानों के अनुसार अनैतिक मतांतरण से जुड़े सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती रखे गए हैं। इन मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में होगी। सामान्य प्रकरणों में दोष सिद्ध होने पर सात से दस साल की कैद तथा कम से कम पाँच लाख रुपये के जुर्माने की व्यवस्था की गई है। यदि पीड़ित व्यक्ति महिला, नाबालिग अथवा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ा है, तो दस से बीस वर्ष का कारावास और न्यूनतम दस लाख रुपये का अर्थदंड लगेगा। सामूहिक रूप से धर्म बदलवाने के मामलों में कम से कम दस वर्ष की कैद से लेकर उम्रकैद तथा पच्चीस लाख रुपये दंड का कड़ा नियम बनाया गया है। केवल मतांतरण कराने के इरादे से रचाए गए विवाह को कानूनी तौर पर अमान्य घोषित किया जाएगा। पैतृक धर्म में दोबारा लौटने को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

प्रशासनिक नियमों के तहत अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को सक्षम प्राधिकृत अधिकारी या जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी। यह विवरण संबंधित ग्राम पंचायत, थाने और विभागीय पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि लोग तीस दिनों में आपत्तियां दर्ज करा सकें। नब्बे दिनों के भीतर प्रक्रिया पूर्ण न होने पर यह अर्जी अपने आप निरस्त मानी जाएगी।

मंत्रिपरिषद ने इस कानून के साथ ही कई अन्य अहम नीतिगत फैसलों को भी स्वीकृति दी थी। प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और विश्वसनीयता लाने के लिए छत्तीसगढ़ लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक 2026 के मसौदे को हरी झंडी दी गई थी। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल विधेयक 2026, छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश संशोधन विधेयक 2026 और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम 1972 के संशोधन मसौदे स्वीकृत किए गए। शासन के अनुसार छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 40, 50 एवं 59 में संशोधन, जमीन पंजीयन पर लगने वाले उपकर शुल्क की समाप्ति, राजनीतिक प्रकरणों की वापसी और राजनांदगांव में खेल मैदान व क्रिकेट अकादमी हेतु राजगामी संपदा की पाँच एकड़ भूमि आवंटन को भी मंजूरी दी गई थी।

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