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महासमुंद में निर्माण श्रमिक को मिल रही मासिक पेंशन, आंगनबाड़ी कर्मियों ने दी 27 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Vinoth offl / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में निर्माण क्षेत्र के बुजुर्ग कामगारों को आर्थिक सहारा देने की दिशा में पहल जारी है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक पेंशन सहायता योजना के माध्यम से वृद्ध कामगारों को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस योजना के अंतर्गत गंगा ध्रुव को प्रति माह 1,500 रुपये की पेंशन राशि प्रदान की जा रही है। शासन का दावा है कि इस मासिक आर्थिक सहायता का मुख्य उद्देश्य उम्रदराज निर्माण श्रमिकों के जीवन यापन को सुगम बनाना और उनके बुढ़ापे की आर्थिक चिंताओं को कम करना है।

दूसरी तरफ जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता चुना है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच के बैनर तले आगामी 27 अक्टूबर को एक दिवसीय जिला स्तरीय हड़ताल करने का निर्णय लिया गया है। संगठन के तय कार्यक्रम के तहत इस हड़ताल के उपरांत सभी कर्मी जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को संबोधित ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

संयुक्त मंच की प्रतिनिधि सुधा रात्रे के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को शासकीय सेवक के रूप में नियमित करना उनकी प्रमुख मांग है। मंच का कहना है कि जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कार्यकर्ताओं को 30,000 रुपये और सहायिकाओं को 25,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को सीधे सुपरवाइजर तथा सहायिकाओं को कार्यकर्ता पद पर पदोन्नत करने और पदोन्नति में उम्र की सीमा समाप्त करने की मांग भी रखी गई है।

मंच ने सेवा शर्तों में समूह बीमा, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल करने पर बल दिया है। इसके अतिरिक्त कार्य के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति देने तथा सेवानिवृत्ति के अवसर पर कार्यकर्ता को 5 लाख रुपये एवं सहायिका को 3 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने की मांग की गई है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में जुटी महिला कर्मियों पर कार्यभार बढ़ रहा है, इसलिए उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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