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स्वामित्व योजना: धमतरी के 501 राजस्व गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा, 63 हजार से अधिक अधिकार अभिलेख तैयार

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: amarujala.com

धमतरी जिले में आबादी भूमि पर निवासरत ग्रामीणों को संपत्ति का मालिकाना हक दिलाने के उद्देश्य से स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार अधिकार अभिलेख तैयार करने और उनके वितरण के मामले में धमतरी जिला राज्य में अग्रणी स्थान पर है। योजना के अंतर्गत जिले के 501 ग्रामीण राजस्व ग्रामों में सर्वे ऑफ इंडिया के तकनीकी सहयोग से ड्रोन सर्वेक्षण का कार्य कराया गया है।

ड्रोन से प्राप्त आंकड़ों और मानचित्रों के माध्यम से आबादी भूमि का सटीक मानचित्र तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि ग्रामीणों के भूखंडों एवं संपत्तियों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित हो सके। इसके मैदानी सत्यापन हेतु बहुस्तरीय प्रक्रिया अपनाई गई। राजस्व विभाग के मैदानी अमले द्वारा पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक के माध्यम से आबादी भूमि की सीमाओं का निर्धारण किया गया। इसके उपरांत राजस्व एवं पंचायत विभाग के समन्वय से आबादी क्षेत्र के भीतर स्थित मकानों, भूखंडों तथा शासकीय परिसंपत्तियों की सीमाओं को चूने से चिह्नित कर उनका भौतिक सत्यापन किया गया।

सर्वे ऑफ इंडिया से मिले नक्शों का पटवारी द्वारा स्थल पर मिलान करने के बाद प्रारंभिक अभिलेख तैयार किए गए। आवश्यक संशोधनों के बाद ग्राम पंचायतों में इन अभिलेखों का प्रथम प्रकाशन कराया गया। इस दौरान प्राप्त दावा-आपत्तियों का ई-कोर्ट के जरिए नियमानुसार निराकरण किया गया। इसके बाद ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पारित कराकर अभिलेखों का अंतिम प्रकाशन किया गया और उन्हें पोर्टल पर प्रविष्ट किया गया।

आंकड़ों के मुताबिक जिले के 501 गांवों में प्रथम प्रकाशन और 390 से अधिक गांवों में अंतिम प्रकाशन की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। जिले में 78,416 अधिकार अभिलेख तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके सापेक्ष अमले ने अब तक 63,826 अधिकार अभिलेख तैयार कर लिए हैं। इनमें से 47 हजार से अधिक दस्तावेज पात्र ग्रामीणों को वितरित किए जा चुके हैं।

हाल ही में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने 40 हितग्राहियों को स्वामित्व प्रमाण पत्र यानी पॉसेशन सर्टिफिकेट प्रदान किए थे। योजना के तहत बाकी गांवों में अभिलेख निर्माण एवं संबंधित औपचारिकताएं नवंबर 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

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