शासन-प्रशासन

आचरण नियम स्थगन और वित्त निर्देश 14/2026 — छत्तीसगढ़ प्रशासन के दो बड़े फैसले

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: rupixen / Unsplash

छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन विभाग ने 21 अप्रैल 2026 को सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी कर शासकीय सेवकों पर राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी सख्त पाबंदियाँ लागू की थीं। उन निर्देशों में स्पष्ट था कि कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल या संगठन की सदस्यता नहीं लेगा, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक कार्यक्रमों में भागीदारी नहीं करेगा और बिना पूर्वानुमति के किसी संस्था, समिति या संगठन में कोई पद स्वीकार नहीं करेगा। उल्लंघन की स्थिति में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

महज चौबीस घंटे के भीतर उप सचिव अंशिका पांडेय के हस्ताक्षर से 22 अप्रैल 2026 को एक नया आदेश जारी हुआ, जिसमें 21 अप्रैल के समस्त निर्देशों को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया गया। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा के अनुसार उनके संगठन ने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और उपसचिव के समक्ष इस आदेश का कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उनका कहना था कि कर्मचारी संगठन लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक अपनी माँगें पहुँचाते हैं और 21 अप्रैल के निर्देश उसी व्यवस्था के प्रतिकूल थे। विरोध के बाद ही इन निर्देशों पर रोक लगाई गई।

इसी अवधि में वित्त विभाग ने एक अलग और दूरगामी कदम उठाया। वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव द्वारा हस्ताक्षरित 'वित्त निर्देश 14/2026' तत्काल प्रभाव से लागू होकर 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। newsonair.gov.in की रिपोर्ट के अनुसार इस निर्देश के तहत मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और अन्य अधिकारियों के काफिले में केवल आवश्यक वाहनों को ही अनुमति होगी। ईंधन व्यय घटाने के लिए वाहन पूलिंग अनिवार्य की गई है और सरकारी वाहनों को चरणबद्ध ढंग से इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जाएगा।

शासन के अनुसार सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। बैठकें यथासंभव वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने का निर्देश दिया गया है और सरकारी भवनों में ऊर्जा संरक्षण उपाय अनिवार्य किए गए हैं। शासन के अनुसार इन उपायों का उद्देश्य राज्य के वित्तीय संसाधनों का अनुशासित उपयोग सुनिश्चित करना है।

एक ही सप्ताह में आचरण नियमों पर पलटी और मितव्ययिता के व्यापक निर्देश — दोनों घटनाक्रम राज्य के प्रशासनिक निर्णय-तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं।