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कृषि कार्यों से निकलकर ढुलाई और व्यावसायिक गतिविधियों में बढ़ा ट्रैक्टरों का चलन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बढ़ा जोखिम

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: assets.tractorguru.in

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ट्रैक्टरों का उपयोग अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गया है। जुताई के साथ-साथ मिट्टी, बालू और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्रियों के परिवहन में इसका दायरा काफी बढ़ चुका है। चतरा ज़िले के मयूरहंड क्षेत्र और हजारीबाग-इटखोरी मुख्य मार्ग पर ट्रैक्टरों को खेती के अलावा बहुउद्देशीय कार्यों में लगाने की प्रवृत्ति लगातार देखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर लोग इसे भारी क्षमता के कारण ‘हाथी वाहन’ के रूप में भी पुकारने लगे हैं।

पूर्व में जहां यह साधन मुख्यतः भूमि तैयार करने, धान सहित अन्य फसलों की कटाई और मड़ाई तक केंद्रित था, वहीं अब इसे मालगाड़ी की तरह भारी सामान ढोने के एक प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। कठिन परिस्थितियों और उबड़-खाबड़ रास्तों में संचालन की क्षमता और ढांचागत मजबूती के कारण व्यापारिक गतिविधियों में भी इसकी मांग निरंतर बनी हुई है। शहरी इलाकों में निर्माण कार्यों से जुड़े सामान की ढुलाई के लिए भी इसका व्यापक उपयोग हो रहा है।

सड़क मार्गों पर ट्रैक्टर के इंजन के ऊपर सीमेंट की बोरियां और अन्य सामान रखकर ले जाने के कई मामले सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर कम लागत और सुलभता के चलते लोग इस माध्यम को अपना रहे हैं, परंतु निर्धारित क्षमता से अधिक अथवा असुरक्षित तरीके से सामग्री का परिवहन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

व्यावसायिक क्षेत्र में बढ़ते उपयोग के बीच जानकारों का मानना है कि यातायात और सुरक्षा नियमों की अनदेखी बड़ी सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस वाहन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाने के बावजूद ढुलाई के दौरान तय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

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