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कोण्डागांव में हीलर हर्बल गार्डन योजना शुरू, 48 वैद्यों को मिला स्वीकृति पत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Amiyashrivastava / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव ज़िले में पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान के संरक्षण के लिए हीलर हर्बल गार्डन योजना शुरू की गई है। इस पहल के तहत ज़िला स्तरीय वैद्य सम्मेलन में 48 पारंपरिक चिकित्सकों को अपने घरों के बाड़ी परिसर में औषधीय पौधे लगाने के लिए पहली किस्त के स्वीकृति पत्र सौंपे गए। इस कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधी पादप बोर्ड तथा दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल द्वारा काष्ठागार परिसर में किया गया था।

जनसंपर्क विभाग और विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस सम्मेलन में दक्षिण कोण्डागांव और केशकाल वनमंडल क्षेत्र से लगभग 200 वैद्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने योजना की औपचारिक शुरुआत की। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सकों को उनकी बाड़ियों में ज़रूरी औषधीय वनस्पतियाँ उगाने के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद देना है, ताकि सामान्य उपचार में प्रयुक्त होने वाली जड़ी-बूटियाँ सरलता से मिल सकें।

सम्मेलन के दौरान बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जेएसीएस राव ने जानकारी दी कि वैद्यों के समूहों को जड़ी-बूटियाँ पीसने और तैयार करने के लिए निःशुल्क पल्वराइज़र मशीनें उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अतिरिक्त वैद्यों के गाँवों के विद्यालयों में स्कूल हर्बल गार्डन तैयार करने के लिए तकनीकी व आर्थिक मदद दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के वैद्यों के प्रमाणीकरण और उनके पारंपरिक उत्पादों तथा औषधियों के पेटेंट कराने में भी बोर्ड सहयोग करेगा।

सम्मेलन में रामप्रसाद निषाद, सुखमन मरकाम, हीरालाल मरकाम, जेठूराम प्रधान और नथाराम नाग सहित कई वैद्यों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने पहचान पत्र जारी करने और घटती वनौषधियों के संरक्षण की माँग रखी। दक्षिण कोण्डागांव के वनमंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह ने पारंपरिक ज्ञान को दर्ज करने, विभिन्न बीमारियों के विशेषज्ञ वैद्यों की सूची बनाने और दुर्लभ होती वनौषधियों के संरक्षण की योजना तैयार करने पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम में उप वनमंडल अधिकारी आशीष कुमार कोटरीवार, परिक्षेत्र अधिकारी मोतीलाल बेसरिया और प्रतीक वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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