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कोरबा में धूप-बारिश के बीच धान पर तना छेदक का हमला, 50 हेक्टेयर से अधिक रकबा प्रभावित

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Kailash Kumbhkar / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

कोरबा ज़िले में मौसम के लगातार उतार-चढ़ाव और बारिश के तुरंत बाद तेज़ धूप निकलने से धान की खेती पर तना छेदक कीट का संकट गहरा गया है। ज़िले के बरपाली और समीपवर्ती ग्रामीण इलाकों में करीब 50 हेक्टेयर से अधिक रकबे में फैली फसलें इस कीट के प्रकोप से प्रभावित हुई हैं। खेतों में बालियां आने से पहले ही पौधों के विकास में रुकावट आने लगी है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

कृषि जानकारों के अनुसार धान रोपाई के 15 से 45 दिनों के बीच का समय फसलों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। जब वायुमंडल का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और हवा में नमी का स्तर 70 से 80 प्रतिशत के आसपास रहता है, तब यह कीट तेजी से पनपता है। हाल के दिनों में बरसात और तीखी धूप के मिले-जुले प्रभाव से खेतों में बनी भारी उमस ने कीटों के फैलाव के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर दी हैं।

इस कीट के हमले से धान के पौधे पीले पड़ने लगते हैं और फूल आने या दाने बनने से पूर्व ही उनके सूखकर नष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। जुलाई से अक्टूबर के दौरान सक्रिय रहने वाला यह कीट मुख्य रूप से पौधों की गोभ को नुकसान पहुँचाता है। सामान्य किस्मों की अपेक्षा बासमती किस्म के धान पर इसका प्रभाव अधिक दर्ज किया जाता है। खेतों में नुकसान की रोकथाम के लिए किसानों ने अपने स्तर पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव आरंभ कर दिया है।

कृषि विभाग के उपसंचालक डीपीएस कंवर के अनुसार किसानों को फसल सुरक्षा के लिए समय पर दवा छिड़कने की सलाह दी गई है। विभागीय अधिकारियों ने काश्तकारों से अपील की है कि वे खेतों का निरंतर निरीक्षण करते रहें। इसके साथ ही मैदानी अमले और ग्रामीण कृषि विकास विस्तार अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे गांवों में पहुंचकर किसानों से संपर्क साधें तथा उन्हें आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं।

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