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कोरबा में मिनीमाता बांगो बांध के नौ गेट खुले, हसदेव नदी में 41 हज़ार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Mananjpatel1996 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

कोरबा स्थित मिनीमाता हसदेव बांगो जलाशय में जलभराव नियंत्रित करने के लिए नौ गेट लगभग छह मीटर तक खोले गए हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार, वर्तमान में बांध के गेटों से 32,080 क्यूसेक और जल विद्युत संयंत्र के माध्यम से 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस तरह हसदेव नदी में कुल 41,080 क्यूसेक पानी का बहाव हो रहा है, जबकि जलाशय में लगभग 16,700 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, बांध का मौजूदा जलस्तर 358.60 मीटर पहुंच गया है, जो कुल भराव क्षमता का 93.65 प्रतिशत है। पिछले सात घंटों के दौरान जलस्तर में सात सेंटीमीटर की कमी आई है। अधिकारियों का कहना है कि जब जलस्तर घटकर 358.32 मीटर यानी 92 प्रतिशत भराव क्षमता पर पहुंचेगा, तब गेट बंद किए जाएंगे।

भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से हसदेव नदी उफान पर आ गई है, जिसका सीधा असर निचले तटीय क्षेत्रों में देखा जा रहा है। कोरबा के सीतामणी इलाके में नदी किनारे बने करीब आठ से दस घरों में पानी घुस गया। स्थानीय निवासी साधना चौहान के अनुसार, गेट खुलने की सूचना मिलने के कुछ ही समय बाद अचानक पानी भर गया, जिससे कई घरों में रखी खाद्य सामग्री और अनाज बह गया। स्थानीय नागरिक भोजराम ने प्रशासन से मांग की है कि बेघर हुए परिवारों को सामुदायिक भवन अथवा विश्राम गृह में ठहराने का प्रबंध किया जाए। प्रभावित लोग सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने को मजबूर हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने नदी तटीय गांवों में मुनादी करवाकर अलर्ट जारी किया है। हसदेव नदी आगे चलकर चांपा के पास महानदी में समाहित होती है। इस संगम के कारण जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ ज़िलों के मैदानी व तटीय इलाकों में भी जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इसके मद्देनजर संबंधित ज़िला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें स्थिति की लगातार निगरानी कर रही हैं।

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