छत्तीसगढ़ में मदिरा दुकानों पर 1 अक्टूबर से बंद होगा नकद लेन-देन, केवल डिजिटल भुगतान मान्य

छत्तीसगढ़ की मदिरा दुकानों में आगामी 1 अक्टूबर से नकद भुगतान की व्यवस्था समाप्त की जा रही है। इसके स्थान पर केवल ऑनलाइन माध्यमों से ही राशि स्वीकार की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस नई व्यवस्था को लागू करने का मुख्य उद्देश्य मदिरा बिक्री में पारदर्शिता लाना और ग्राहकों से तय दर से अधिक रकम वसूलने की शिकायतों पर पूरी तरह अंकुश लगाना है।
राजधानी रायपुर सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से मदिरा की वास्तविक दरों से अधिक राशि लिए जाने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। ग्राहकों से प्रत्येक बोतल पर बीस से तीस रुपये अतिरिक्त मांगने और खुले पैसों के अभाव का हवाला देकर पूरी शेष राशि रख लेने की शिकायतें मिली हैं। रायपुर के गुल्लू और लखोली जैसे इलाकों से इस प्रकार की अवैध वसूली के मामले सामने आए थे। इसके साथ ही दुकानों के पिछले दरवाजों से अवैध विक्रेताओं को मदिरा की थैलियां सौंपने जैसी अनियमितताएं भी देखी गई हैं।
आंकड़ों के अनुसार रायपुर जिले में लगभग 70 मदिरा दुकानें संचालित हैं, जहां प्रतिदिन औसतन 3 करोड़ रुपये की वैध बिक्री दर्ज होती है। राज्य भर में कुल 500 से अधिक मदिरा दुकानों का संचालन किया जा रहा है। एक सामान्य अनुमान के मुताबिक प्रत्येक दुकान से प्रतिदिन औसतन कम से कम 500 बोतलों की बिक्री होती है। अधिक दर पर मदिरा बेचने के मामलों पर आबकारी विभाग के उड़नदस्तों द्वारा समय-समय पर प्रकरण दर्ज किए जाते हैं। नियम तोड़ने वाले कर्मचारियों को काली सूची में डालने के साथ संबंधित प्लेसमेंट एजेंसियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है।
अधिकारियों का मानना है कि सभी दुकानों पर पूर्णतः डिजिटल भुगतान अनिवार्य होने से कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली मनमानी वसूली रुकेगी। हर बिक्री का इलेक्ट्रॉनिक ब्योरा उपलब्ध होने से न केवल राजस्व प्रणाली सुदृढ़ होगी, बल्कि ग्राहकों को निर्धारित दर पर ही सामग्री मिलना सुनिश्चित हो सकेगा। यह अनिवार्य ऑनलाइन प्रणाली 1 अक्टूबर से प्रदेश स्तर पर प्रभावी कर दी जाएगी।