छत्तीसगढ़ में कम गंभीर नक्सल मामलों की विधिक समीक्षा के निर्देश, मुकदमों की वापसी पर होगा विचार

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े कम गंभीर मामलों में कारागार में बंद कैदियों की रिहाई के विधिक पहलुओं की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया के अंतर्गत केवल उन्हीं प्रकरणों को शामिल किया जाएगा जिनमें किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई है। विधिवत कानूनी जांच के बाद पात्र पाए जाने वाले मुकदमों को वापस लेने पर विचार किया जाएगा।
गृह मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नक्सल प्रभावित अंचलों में पुनर्वास, राहत तथा विकास कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक के दौरान उन्होंने विधि विभाग की सहायता से सरकारी अधिवक्ताओं और अभियोजन अधिकारियों का एक विशेष दल गठित करने के निर्देश दिए। यह दल पात्र मामलों का विधिक परीक्षण करेगा, जिसके उपरांत न्यायालयों से प्रकरण वापसी की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, विचाराधीन बंदियों को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने हेतु शासकीय वकीलों की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनहानि अथवा गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को इस समीक्षा से बाहर रखा गया है। प्रकरणों की प्रगति और स्थिति की साप्ताहिक समीक्षा संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के स्तर पर की जाएगी। राज्य शासन ने इस साल 31 मार्च को प्रदेश को हथियारबंद नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित करने के संदर्भ में यह प्रशासनिक पहल की है।
पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी नीतिगत घोषणा की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिन ग्रामों ने स्वयं को नक्सल प्रभाव से मुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया है, वहां एक-एक करोड़ रुपये की लागत के निर्माण एवं विकास कार्यों को स्वीकृति दी जाएगी। वर्तमान में ऐसे 50 गांवों की पहचान की गई है, जिनमें सुकमा और बीजापुर जिले के 20-20 गांव तथा नारायणपुर जिले के 10 गांव शामिल हैं। समीक्षा बैठक में आगामी 15 अगस्त को इन सभी चिन्हित गांवों में तिरंगा यात्रा आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।