छत्तीसगढ़ में घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट बिजली छूट की समय-सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ी

छत्तीसगढ़ में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट तक की खपत पर मिलने वाली पचास प्रतिशत रियायत की अवधि को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रशासनिक व्यवस्था को निरंतर रखने पर सहमति बनी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू श्रेणी के बिजली बिलों में उपभोक्ताओं को आर्थिक सहयोग देना और सौर ऊर्जा की दिशा में बदलाव के लिए समय उपलब्ध कराना है।
समीक्षा के अनुसार, राज्य में लागू मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के दायरे में यह रियायत प्रदान की जा रही है। तय मानकों के तहत 400 यूनिट तक की मासिक खपत करने वाले परिवारों को 200 यूनिट तक आधा बिल चुकाना होता है। जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 400 यूनिट से अधिक दर्ज होगी, उन्हें इस योजना के तहत किसी भी प्रकार की छूट की पात्रता नहीं होगी। इससे पहले शासन स्तर पर रियायत की सीमा 100 यूनिट निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 200 यूनिट किया गया था।
आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस व्यवस्था से राज्य के लगभग 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। पूर्व से संचालित नियमों के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले करीब 15 लाख बीपीएल परिवारों को प्रतिमाह मिलने वाली 30 यूनिट निःशुल्क बिजली की सुविधा भी यथावत जारी रखी गई है। राज्य में कुल 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से करीब 31 लाख परिवार ऐसे चिन्हित हैं, जिनकी मासिक खपत 100 यूनिट या उससे कम रहती है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रियायत की इस समयावधि के भीतर नागरिकों को रूफटॉप सौर संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 3 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के संयंत्र पर केंद्र शासन से 78,000 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 30,000 रुपये का अनुदान निर्धारित है। इसके अतिरिक्त 2 किलोवॉट क्षमता वाले संयंत्र पर कुल 90,000 रुपये की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। शासन का कहना है कि घरों की छतों पर सौर संयंत्र स्थापित होने के बाद उपभोक्ता अपने मासिक बिजली बिल को न्यूनतम स्तर पर ला सकेंगे और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को स्थानांतरित कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।