छत्तीसगढ़ में दो नए मार्गों पर रेल परिचालन शुरू, रावघाट और कुरूद से जुड़ी राजधानी

छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी को विस्तार देते हुए रावघाट-रायपुर और रायपुर-कुरूद मार्गों पर यात्री रेल सेवाओं का विधिवत परिचालन प्रारंभ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरी झंडी दिखाकर इन ट्रेनों को रवाना किया। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े, जबकि सांसद बृजमोहन अग्रवाल प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।
स्वीकृत योजना के संदर्भ में अधिकारियों के अनुसार रायपुर और रावघाट के बीच गाड़ी संख्या 68768/68769 मेमू तथा रायपुर से कुरूद के मध्य गाड़ी संख्या 68772/68771 एवं 68774/68773 मेमू ट्रेनों को रेलवे बोर्ड से पूर्व में मंजूरी दी गई थी। ताड़ोकी-रावघाट रेल लाइन के जुड़ने से यह अंचल सीधे राजधानी रायपुर से संबद्ध हो गया है। इस रूट पर न्यूनतम यात्रा किराया 55 रुपये रखा गया है।
रावघाट तक रेल नेटवर्क बिछाने का प्रयास ऐतिहासिक रूप से लंबा रहा है। बंगाल नागपुर रेलवे ने 1914 से 1918 के बीच इस क्षेत्र का प्रारंभिक सर्वेक्षण कराया था। बाद में 1974 में तकनीकी और आर्थिक सर्वेक्षण का प्रथम चरण पूरा हुआ। इसके पश्चात 1998-99 के रेल बजट में इस परियोजना को शामिल कर सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी। वर्ष 2005 से 2007 के मध्य रेलवे, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और राज्य शासन के बीच त्रिपक्षीय अनुबंध हुआ। वर्ष 2008 में रेल विकास निगम लिमिटेड को निर्माण कार्य सौंपा गया। घने वन क्षेत्र में 95 किलोमीटर लंबी पटरी बिछाने के दौरान सुरक्षा के लिए एसएसबी और बीएसएफ की तैनाती रही। कार्य के दौरान विभिन्न हमलों में तीन सुरक्षाकर्मियों तथा चार श्रमिकों की मृत्यु हुई थी।
प्रशासनिक आकलन के अनुसार अबूझमाड़ सीमा से लगे ग्रामीणों को अब रायपुर आवागमन हेतु बसों अथवा निजी वाहनों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। स्थानीय वनोपज जैसे हर्रा, महुआ, इमली और अन्य उपजों को बड़े व्यापारिक केंद्रों तक ले जाने में सुविधा मिलेगी। दल्लीराजहरा में भंडार सीमित होने के कारण यह मार्ग भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क आपूर्ति हेतु भी उपयोगी माना जा रहा है। रेल मंत्री के अनुसार आने वाले महीनों में इस सेवा का विस्तार धमतरी तक करने का लक्ष्य है।