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छत्तीसगढ़ में बिजली बिल भुगतान समाधान योजना: बकायादारों को मिलेगी अधिभार और मूलधन में रियायत

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Suyash Dwivedi / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ शासन ने लंबे समय से बिजली बिल जमा करने में असमर्थ रहे उपभोक्ताओं को वित्तीय राहत देने के उद्देश्य से बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल के सभागार से इस व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल के तहत राज्य के पात्र उपभोक्ताओं को लंबित देनदारियों के अधिभार तथा मूलधन में तय नियमों के आधार पर छूट दी जा रही है।

शासकीय आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के माध्यम से प्रदेश भर के करीब 28.42 लाख उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक राहत मिलने का आकलन है। अधिकारियों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी और आर्थिक परेशानियों के चलते कई घरेलू तथा कृषि उपभोक्ता समय पर बिल नहीं भर सके थे, जिससे उन पर अधिभार बढ़ता गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस समस्या के निवारण के लिए ही यह विशेष समाधान पेश किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य अपने संसाधनों से लगभग 30,000 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है और वर्ष 2014 के बाद से देश के करीब 18,000 अंधेरे गांवों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

योजना के तहत उपभोक्ताओं को तीन मुख्य वर्गों में बांटा गया है। इनमें 31 मार्च 2023 तक के निष्क्रिय कनेक्शनधारी, एकल-बत्ती कनेक्शन वाले सक्रिय उपभोक्ता तथा गैर-सरकारी सक्रिय घरेलू व कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। तय प्रावधानों के तहत पात्र हितग्राहियों को सरचार्ज पर शत-प्रतिशत की माफी और बकाया मूल रकम पर 75 प्रतिशत तक की रियायत दी जा रही है।

प्रक्रिया का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीकरण कराना आवश्यक है। पंजीयन कराते समय कुल बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा जमा करना अनिवार्य रखा गया है। इसके बाद शेष बची रकम को बिना किसी अतिरिक्त अधिभार के आगामी महीनों की किस्तों में चुकाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, निर्धारित समय-सीमा में भुगतान करने वाले पात्र उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट का विकल्प भी दिया गया है।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को योजना के प्रमाण पत्र प्रदान किए और लोगों से अनावश्यक बिजली खर्च से बचने तथा ऊर्जा संरक्षण की अपील की। राज्य शासन का मानना है कि इस व्यवस्था से जहां आम नागरिकों व किसानों पर वित्तीय दबाव कम होगा, वहीं विद्युत वितरण कंपनियों को अपने पुराने बकाये की वसूली में सहायता मिलेगी।

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