छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना: धान के बदले पेड़ लगाने पर प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सहायता

छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि पर हरियाली के विस्तार और किसानों की आय में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना लागू की गई थी। इस योजना के तहत धान की फसल के स्थान पर अपने खेतों में फलदार अथवा इमारती प्रजाति के पौधे रोपने वाले कृषकों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से वार्षिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। यह वित्तीय सहयोग आगामी तीन वर्षों तक प्रदान करने का प्रावधान तय किया गया, ताकि किसान पारंपरिक फसलों के अलावा पौधारोपण के लिए प्रेरित हों।
शासकीय विवरण के अनुसार, इस कार्यक्रम को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के साथ भी जोड़ा गया था। कार्ययोजना के अंतर्गत वन विभाग ने 99 लाख से ज्यादा पौधे लगाने की तैयारी सुनिश्चित की थी, जबकि आम नागरिकों के बीच 2 करोड़ 27 लाख पौधों के वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ फलदार पौधों की उपज से ग्रामीण अंचलों में बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना और कुपोषण की दर को घटाना बताया गया।
वित्तीय सहायता का यह ढांचा केवल निजी किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय निकायों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यदि ग्राम पंचायतें अपने उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग करते हुए पौधारोपण करती हैं, तो एक वर्ष की अवधि पूरी होने के उपरांत उन्हें प्रति एकड़ 10 हजार रुपये का वित्तीय लाभ दिया जाता है। ठीक इसी प्रकार, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों द्वारा राजस्व भूमि पर व्यावसायिक आधार पर किए जाने वाले पौधारोपण पर भी इसी दर से राशि आवंटित करने का प्रावधान है।
प्रक्रियात्मक जटिलताओं को समाप्त करने के लिए सरकार ने पेड़ों की कटाई से संबंधित नियमों को अत्यधिक सरल बनाया है। दिशा-निर्देशों के अनुसार, अपने निजी खेतों में रोपे गए वृक्षों के बड़े होने पर उनकी कटाई या निष्कासन के लिए किसानों को किसी भी सरकारी विभाग अथवा अधिकारी से पूर्वानुमति लेने की अनिवार्यता नहीं है। इसके अतिरिक्त, समितियों द्वारा रोपित किए गए व्यावसायिक पेड़ों की कटाई और उनकी बिक्री का संपूर्ण अधिकार भी संबंधित समितियों को ही सौंपा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।