छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता के मसौदे हेतु पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय समिति गठित

छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता का खाका खींचने और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं के परीक्षण के लिए पाँच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार, 25 जून को इस आशय का आधिकारिक आदेश जारी किया। इस समिति की कमान सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। समिति के अन्य सदस्यों में दो पूर्व प्रशासनिक अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा पूर्व प्राचार्य ज्योति रानी सिंह शामिल हैं।
समिति का प्रमुख दायित्व राज्य में सभी धर्मों और समुदायों से जुड़े पर्सनल लॉ तथा प्रचलित नागरिक कानूनों का विस्तृत अध्ययन करना होगा। इसके तहत वैवाहिक व्यवस्था, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति के उत्तराधिकार और बच्चों को गोद लेने से संबंधित मौजूदा कानूनी प्रावधानों की गहन समीक्षा की जाएगी। समिति सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए नागरिक संहिता का संतुलित प्रारूप तैयार करेगी। इसके अलावा आम नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, विधिक जानकारों और अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श कर उनके आवश्यक सुझाव भी संकलित किए जाएँगे।
शासकीय जानकारी के अनुसार, यह कार्यदल उन राज्यों के मॉडलों का भी अध्ययन करेगा जहाँ समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है या उसे लेकर विधायी प्रक्रिया शुरू हुई है। देश में उत्तराखंड इस कानून को लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है, जबकि गुजरात ने मार्च 2026 और असम ने मई 2026 में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया है। इसके साथ ही गोवा में स्वतंत्रता के समय से ही पुर्तगाली नागरिक संहिता प्रभावी रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, शासन सभी पक्षों के साथ व्यापक विमर्श और विधिक सुझावों के आधार पर ही आगामी प्रक्रिया तय करेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य ध्येय विभिन्न पर्सनल लॉ की विसंगतियों को दूर करना तथा महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार सुनिश्चित कराना है। समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट के साथ जरूरी विधिक और प्रशासनिक अनुशंसाएँ राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद आगे का विधायी कदम उठाया जाएगा।