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छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य, कर्मचारी चयन मंडल प्रतिवर्ष कराएगा परीक्षा

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Dvellakat / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों में कार्यरत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस परीक्षा के संचालन की ज़िम्मेदारी छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल को सौंप दी है। विभागीय निर्देशों के तहत चयन मंडल को साल में कम से कम एक बार सामान्य टीईटी का आयोजन सुनिश्चित करना होगा।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 तथा 29 मई 2026 को दिए गए फैसलों के आधार पर यह नीति लागू की गई है। इस नियम की परिधि में पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक अध्यापन कराने वाले वे नियमित शिक्षक आएंगे, जिनकी सेवा अवधि अभी पांच वर्ष अथवा उससे अधिक बची हुई है। इन अध्यापकों को अपने संबंधित अध्यापन स्तर के अनुरूप पात्रता परीक्षा में सफलता हासिल करनी होगी। सेवा में निरंतर बने रहने के साथ-साथ आगामी पदोन्नति का लाभ पाने के लिए भी इस परीक्षा को पास करना अनिवार्य शर्त बनाया गया है।

राज्य में अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा का संचालन छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं के माध्यम से समय-समय पर कराया जाता रहा है। व्यवस्था में फेरबदल करते हुए अब यह उत्तरदायित्व कर्मचारी चयन मंडल के हवाले किया गया है। यह संस्था उन सेवारत नियमित शिक्षकों के लिए परीक्षा लेगी जिन्होंने पूर्व में यह अर्हता हासिल नहीं की है। इसके साथ ही अन्य गैर-सेवारत पात्र अभ्यर्थियों को भी इस सामान्य परीक्षा में बैठने की पात्रता होगी।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संदर्भ में कर्मचारी चयन मंडल के परीक्षा नियंत्रक को विधिवत निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वार्षिक स्तर पर न्यूनतम एक बार परीक्षा होने से कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित समयावधि में अपनी योग्यता प्रमाणित करने का अवसर मिलेगा, साथ ही नए अभ्यर्थियों के लिए भी पात्रता हासिल करने के रास्ते खुले रहेंगे।

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