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छत्तीसगढ़ में 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से होगी तेंदूपत्ता खरीदी, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Harminder Singh Saini / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में तेंदूपत्ता की खरीदी 5500 रुपये प्रति मानक बोरा के पारिश्रमिक मूल्य पर करने का निर्णय लिया है। जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संग्रहण दर की आधिकारिक घोषणा की है। राज्य के वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज संग्रहण से जुड़े ग्रामीण और जनजातीय परिवारों के लिए यह व्यवस्था सीधे तौर पर प्रभावी होगी।

राज्य में वनोपज संग्रहण स्थानीय आदिवासियों के जीवन-यापन का एक मुख्य आधार रहा है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, पारिश्रमिक दर में इस संशोधन से संग्रहकों को उनकी उपज का बेहतर प्रतिफल मिल सकेगा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न वन क्षेत्रों में निवासरत समुदाय वनोपज संग्रहण और वन प्रबंधन के कार्यों से जुड़े रहते हैं।

जमीनी स्तर पर वनों पर आश्रित रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए लघु वनोपज का संग्रहण अत्यंत महत्वपूर्ण है। गरियाबंद जिले के आमझर जैसे आदिवासी गांवों में रहने वाले कमार समुदाय के लोग पारंपरिक रूप से वनों से जुड़े हुए हैं। कमार विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के अंतर्गत आते हैं। इन समुदायों की आजीविका मुख्य रूप से वनोपज जुटाने, बांस के पारंपरिक बर्तन बनाने और मजदूरी करने पर टिकी है।

राजिम में कार्यरत प्रेरक संस्था के निदेशक रामगुलाम सिन्हा के अनुसार, जनजातीय समुदाय लघु वनोपज संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और वन प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पूर्व में ये समुदाय बेवर या झूम खेती भी करते थे, जिसमें झाड़ियों और पत्तों की राख में बीज बोकर झुनगा जैसी फसलें उगाई जाती थीं। अब सामुदायिक वन अधिकार और वन संरक्षण प्रयासों के माध्यम से ये समुदाय जंगलों की रखवाली और संवर्धन कर रहे हैं।

जनसंपर्क विभाग के अनुसार, तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित किए जाने से ग्रामीण अंचलों में वनोपज पर निर्भर परिवारों को आर्थिक संबल प्राप्त होगा। शासन द्वारा इस दर के आधार पर संग्रहण प्रक्रिया के सुचारू संचालन की तैयारी की जा रही है।

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