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छत्तीसगढ़: मेडिकल और डेंटल पीजी विद्यार्थियों का स्टाइपेंड बढ़ा, 1 अक्टूबर से प्रभावी होंगी नई दरें

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: indianexpress.com

छत्तीसगढ़ के शासकीय चिकित्सा और दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत डॉक्टरों के मासिक मानदेय में राज्य प्रशासन ने वृद्धि की है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को प्रशासनिक मंजूरी मिलने के उपरांत 26 सितंबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। आधिकारिक सूचना के आधार पर यह संशोधित दर 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावशील होगी।

नए वित्तीय प्रावधानों के अनुसार चिकित्सा संकाय के स्नातकोत्तर छात्रों के मानदेय में विभिन्न शैक्षणिक वर्षों के अनुरूप वृद्धि की गई है। मेडिकल पीजी के प्रथम वर्ष के अध्येताओं को अब 67,500 रुपये की जगह प्रतिमाह 85,050 रुपये दिए जाएंगे। द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों का मासिक भुगतान 71,450 रुपये से बढ़ाकर 90,027 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही तृतीय वर्ष के रेजीडेंट डॉक्टरों को पूर्व में मिलने वाले 74,600 रुपये के स्थान पर 93,996 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इस संकाय में कुल मानदेय वृद्धि का औसत 26 प्रतिशत दर्ज हुआ है।

दंत चिकित्सा संकाय के स्नातकोत्तर अध्येताओं के मानदेय में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। डेंटल पीजी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को 53,500 रुपये के बजाय अब सीधे 85,050 रुपये मिलेंगे। द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित राशि 56,700 रुपये पर ही यथावत रखी गई है। वहीं अंतिम यानी तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का स्टाइपेंड 59,200 रुपये से संशोधित कर 93,996 रुपये कर दिया गया है। दंत संकाय के कुछ वर्गों में यह बढ़ोतरी 59 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

शासकीय अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था और सामान्य ओपीडी के दैनिक संचालन में स्नातकोत्तर डॉक्टरों की मुख्य भूमिका रहती है। रेजीडेंट डॉक्टर लंबे समय से मानदेय दरों में संशोधन की मांग उठा रहे थे। संचालनालय के प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद शासन ने इसे बिना किसी अवरोध के स्वीकृत किया। आने वाले माह की शुरुआत से ही सभी संबद्ध मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों के पात्र विद्यार्थियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने लगेगा।

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