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छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स नीति 2025: एसजीएसटी प्रतिपूर्ति और पूंजी अनुदान के दोहरे विकल्प, न्यूनतम एक करोड़ रुपये निवेश की शर्त

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Swastik Arora / Unsplash

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को देश के एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में स्थापित करने तथा आधुनिक लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स नीति 2025' लागू की है। शासन के अनुसार इस नीति का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाना और राज्य के समग्र विकास को गति देना है।

नीति के दायरे में लॉजिस्टिक्स पार्क, मल्टीमॉडल हब, वेयरहाउसिंग इकाइयाँ, कोल्ड स्टोरेज, इनलैंड कंटेनर डिपो तथा एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। शासन के अनुसार वेयरहाउसिंग की परिभाषा में कृषि उपज, वन उपज तथा औद्योगिक एवं व्यावसायिक वस्तुओं का भंडारण सम्मिलित है; खुदरा शोरूम इस परिभाषा से स्पष्ट रूप से बाहर रखे गए हैं। केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों — जैसे एफसीआई और सीडब्ल्यूसी — के लिए खाद्यान्न भंडारण परियोजनाएँ भी पात्र मानी गई हैं और ऐसी परियोजनाएँ कृषि अवसंरचना ब्याज अनुदान योजनाओं का भी लाभ उठा सकती हैं।

पात्रता की बुनियादी शर्तों के अनुसार वेयरहाउस का न्यूनतम निर्मित क्षेत्र 10,000 वर्ग फुट और न्यूनतम अनुमानित निवेश लगभग एक करोड़ रुपये होना आवश्यक है। अनुदान गणना के लिए निर्माण लागत की अधिकतम सीमा 1,000 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित की गई है। रोजगार संबंधी अनिवार्य शर्तों के तहत अकुशल श्रमिकों में शत-प्रतिशत, कुशल कार्यबल में 70 प्रतिशत और प्रबंधन स्तर के पदों पर 40 प्रतिशत नियुक्तियाँ छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों से करना अनिवार्य होगा।

प्रोत्साहन के रूप में निवेशकों को दो विकल्पों में से एक चुनने का अधिकार दिया गया है और एक बार विकल्प चुनने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता। पहला विकल्प किराया सेवाओं पर चुकाए गए शुद्ध एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति का है — समूह एक के लिए पाँच वर्ष तक 100 प्रतिशत, समूह दो के लिए सात वर्ष तक तथा समूह तीन के लिए दस वर्ष तक; यह प्रतिपूर्ति स्थायी पूंजी निवेश के अधिकतम 75 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। दूसरा विकल्प पूंजी अनुदान का है, जो समूह तीन के स्थानों में अधिकतम 45 प्रतिशत तथा 22 करोड़ रुपये की सीमा तक देय होगा।

शासन के अनुसार यह नीति बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज क्षेत्रों को भी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार यह नीति राज्य में घरेलू और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का निवेश आकर्षित करने की दृष्टि से तैयार की गई है।