मंडी भाव

एप आधारित फसल गिरदावरी में कृषि अधिकारियों की ड्यूटी का विरोध, बहिष्कार का फैसला

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Jsuhzjakauajjaiqja / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

दुर्ग ज़िले के तार्रीभरदा में छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने मोबाइल एप आधारित फसल गिरदावरी में कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की ड्यूटी लगाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ की वर्चुअल प्रांतीय बैठक में इस गिरदावरी कार्य का सर्वसम्मति से बहिष्कार करने का संकल्प लिया गया। संगठन ने अपनी मांगें पूरी न होने की स्थिति में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष लिखेश वर्मा के अनुसार, फसल गिरदावरी मूल रूप से राजस्व अभिलेखों, खसरा, सीमांकन, नक्शा और बटांकन की प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ प्रशासनिक दायित्व है। शासन की तय व्यवस्था के तहत यह कार्य संबंधित राजस्व अमले तथा सर्वेयरों के माध्यम से ही कराया जाना चाहिए। संघ ने राज्य भर के मैदानी कृषि अधिकारियों से अपील की है कि वे गिरदावरी की प्रक्रिया में शामिल न हों।

प्रांतीय महामंत्री मोहित जैन ने बताया कि कृषि अधिकारियों को राजस्व अभिलेखों, बटांकन, खसरा सीमांकन और खेतों की सटीक भौगोलिक स्थिति की तकनीकी जानकारी व विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त नहीं है। संगठन के महामंत्री नवल साहू के अनुसार, एप में दर्ज की जाने वाली फसल व रकबे की प्रविष्टि न्यूनतम समर्थन मूल्य और आगामी धान खरीदी का मुख्य आधार बनती है। यदि प्रविष्टि में कोई गलती दर्ज होती है, तो इसका सीधा प्रभाव संबंधित किसान पर पड़ सकता है।

संघ के प्रांतीय सचिव दीपक पटेल ने बताया कि खरीफ मौसम में मैदानी अमला पहले से ही कृषक उन्नति योजना, फसल निरीक्षण, कीट-व्याधि नियंत्रण, पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम-आशा, कृषि डीएसएस, किसान पंजीयन व सत्यापन, बीज उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और उर्वरक, बीज व कीटनाशक गुणवत्ता जांच जैसे अहम दायित्वों में जुटा हुआ है। गैर-विभागीय कामों में ड्यूटी लगाने से विभागीय मूल कार्य प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने शासन से कृषि अमले को केवल विभागीय दायित्वों पर केंद्रित रखने की मांग की है।

स्रोत