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जवाली समेत कई इलाकों में बारिश के बीच माताओं ने कमरछठ पर की पूजा

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

जवाली में खराब मौसम और लगातार बारिश के बीच माताओं ने हलषष्ठी यानी कमरछठ का पारंपरिक पर्व पूरे विधि-विधान से मनाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने एकत्र होकर अपनी संतानों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना की। मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद पूजा स्थलों पर सुबह से ही महिलाओं का उत्साह देखने को मिला।

क्षेत्र में सुबह दस बजे के बाद सामूहिक रूप से पूजा का क्रम शुरू हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान के लिए बिना हल जोते खेतों में पैदा होने वाली छह तरह की भाजियों और महुआ लाई का विशेष प्रबंध किया गया। इसके अलावा प्रसाद में राहर दाना भी शामिल किया गया। व्रतियों ने भैंस के दूध का उपयोग करते हुए पसहर चावल की खीर बनाई। सेंधा नमक और भाजियों से तैयार विशेष प्रसाद का भोग अर्पित किया गया। पूजन के दौरान माताओं ने बच्चों की पीठ पर सात बार ठप्पा लगाकर उनके दीर्घ जीवन और मंगलमय भविष्य की प्रार्थना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित है। उनका मुख्य शस्त्र हल होने के कारण इस पर्व पर बिना हल चले उपजे अन्न का ही सेवन किया जाता है। स्थानीय स्तर पर गौतम गुड्डू रामसनेही महाराज के निवास पर उनकी माताजी के मार्गदर्शन में कमरछठ की कथा का वाचन हुआ। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया और धार्मिक परंपराओं का पालन किया।

इस धार्मिक आयोजन में तीजबाई, बबली, सरस्वती, उमा, रजनी, दिलबाई, शीला, सिकन, दरहीन और आयो सहित अनेक महिलाएं शामिल हुईं। जवाली के अलावा मध्यनारी, मौहारपारा और ठाकुरपारा क्षेत्रों में भी कमरछठ का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

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