जशपुर के छह गांवों में तीस होमस्टे बनाने की योजना स्वीकृत, खर्च होंगे 1.80 करोड़ रुपये

जशपुर जिले के आदिवासी क्षेत्र में पर्यटन को मजबूती देने के लिए छह गांवों में कुल तीस होमस्टे विकसित करने की योजना को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई है। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के अंतर्गत इस क्लस्टर आधारित परियोजना का संचालन होगा। पूरी परियोजना पर करीब एक करोड़ अस्सी लाख रुपये की वित्तीय राशि व्यय करने का प्रस्ताव रखा गया है।
योजना के विवरण के अनुसार बगीचा, मयाली और जशपुर बेल्ट के अंतर्गत आने वाले छह गांवों का चयन इस पहल के लिए हुआ है। इन चिन्हित बस्तियों में किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ शामिल हैं। परियोजना के तहत प्रत्येक गांव के भीतर पांच-पांच होमस्टे स्थापित किए जाने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त चयनित ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सामुदायिक सुविधाओं के संवर्धन के वास्ते हर गांव में पांच लाख रुपये तक के विकास कार्यों का भी प्रावधान तय किया गया है।
जनसंपर्क विभाग और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार होमस्टे क्लस्टर के लिए चुने गए ये गांव जिले के प्रमुख आकर्षणों के नजदीक स्थित हैं। इन स्थलों में कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़ और लोरोघाट शामिल हैं। शासन का मानना है कि इन क्षेत्रों में ठहरने की समुचित व्यवस्था होने से पर्यटकों को प्रकृति और स्थानीय जीवनशैली को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटक होटलों के बजाय स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण परंपराओं, लोक संस्कृति और क्षेत्रीय खान-पान से सीधे जुड़ सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य सैलानियों को रिहाइश उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय आबादी को पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इसके जरिए स्थानीय युवाओं और महिलाओं को होमस्टे प्रबंधन, गाइड, परिवहन व्यवस्था, पारंपरिक भोजन की तैयारी और हस्तशिल्प बिक्री जैसी गतिविधियों से आजीविका मिलने की उम्मीद है। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने से स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक खान-पान की मांग में इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को सीधे आय अर्जित करने का नया माध्यम प्राप्त होगा।