निजी कॉलोनियों की जमीन पर 25 हजार से अधिक मकान निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

निजी कॉलोनियों में आरक्षित जमीन का इस्तेमाल कर कमजोर आय वर्ग के लिए पक्के मकान तैयार करने की पहल पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने इस व्यवस्था को सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली श्रेणी के अंतर्गत चयनित किया। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित विश्व पर्यावास दिवस के कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने यह सम्मान प्रदान किया। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व राज्य मिशन संचालक सुमित अग्रवाल ने पुरस्कार ग्रहण किया।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, निजी आवासीय कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय वर्ग के हितग्राहियों के वास्ते तय भूमि पर बीते दो वर्षों में 25,413 पक्के आवास निर्मित किए जा चुके हैं। इस व्यवस्था के कारण नए निर्माण के लिए अलग से शासकीय भूमि आवंटित करने की बाध्यता समाप्त हुई। कुल तैयार आवासों में योजना के प्रथम चरण के 17,790 मकान तथा द्वितीय चरण के 7,623 मकान शामिल हैं। आधिकारिक विवरण के अनुसार, निजी कॉलोनियों में आरक्षित रकबे पर इतने बड़े पैमाने पर वास्तविक निर्माण पहली बार कराया गया है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य प्रशासन सबके लिए आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के प्रथम चरण के दौरान वर्ष 2015 से 2024 के मध्य छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों के लिए 4.6 लाख से अधिक मकान स्वीकृत किए गए थे। विभागीय ब्योरे के मुताबिक, इनमें से लगभग 80 से 85 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। शेष 15 से 20 प्रतिशत अनिर्मित आवासों को दिसंबर 2026 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है। इसके अलावा, योजना के दूसरे चरण के तहत वर्ष 2026 में राज्य के लिए 2.80 लाख नए नगरीय आवासों को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। इनका काम अभी शुरुआती स्तर पर है और विभागीय योजना के अनुसार आगामी छत्तीस महीनों में इनका निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।