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निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में सीधे दाखिले पर रोक, संचालनालय ने जारी किए निर्देश

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: dy3rma73kowlp.cloudfront.net

छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने गैर-सरकारी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों और निजी विश्वविद्यालयों में तकनीकी पाठ्यक्रमों के दाखिलों को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संचालनालय के अनुसार सामान्य प्रवेश परीक्षा और तय व्यवस्था के बिना सीधे दिए गए सभी दाखिले नियम विरुद्ध माने जाएंगे। ऐसे अपात्र प्रवेशों को कानून के तहत अमान्य यानी शून्य घोषित किया जाएगा।

तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने प्रदेश के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के कुलसचिवों को पत्र भेजकर मौजूदा कानूनी व्यवस्था का स्मरण कराया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था (प्रवेश का विनियमन-शुल्क का निर्धारण) अधिनियम, 2008 में पहले से दर्ज प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। बिना सरकारी सहायता पाने वाले संस्थानों की सभी स्वीकृत सीटों पर राज्य सरकार द्वारा तय प्रणाली के तहत ही प्रवेश दिया जाना अनिवार्य है।

संचालनालय के अनुसार बीई, बीटेक, एमटेक, एमबीए, एमसीए, फार्मेसी और डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश केवल निर्धारित सामान्य प्रवेश परीक्षा की प्रावीण्य सूची के आधार पर होगा। इसके लिए सीजी पीईटी, सीजी पीपीएचटी, पीपीटी, प्री-एमसीए और जेईई जैसी अधिकृत परीक्षाओं की मेरिट सूची का पालन करना होगा। हर तकनीकी पाठ्यक्रम के लिए शासन द्वारा निर्धारित विशिष्ट प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी रहेगा।

विभाग ने निजी विश्वविद्यालयों को आगाह किया है कि निर्धारित प्रणाली का उल्लंघन कर सीधे दाखिला देने की स्थिति में सारी वैधानिक जवाबदेही प्रबंधन की होगी। यदि नियमों की अनदेखी के चलते विद्यार्थियों की डिग्री की मान्यता निरस्त होती है या उन्हें छात्रवृत्ति की पात्रता से वंचित होना पड़ता है, तो इसके लिए संबंधित संस्थान ही पूर्ण रूप से उत्तरदायी होंगे।

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