पीडीएस में सुधार के लिए मध्य प्रदेश की युवा अन्नदूत योजना अपनाएगा छत्तीसगढ़, अधिकारियों ने समझी व्यवस्था

छत्तीसगढ़ सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के परिवहन मॉडल को लागू करने पर विचार कर रही है। राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों ने पड़ोसी राज्य का दौरा करके मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना की जमीनी कार्यप्रणाली और वित्तीय संरचना का अध्ययन किया है। इस पहल का मुख्य मकसद खाद्यान्न परिवहन से बिचौलियों और ठेकेदारों के प्रभाव को समाप्त करना तथा राशन सामग्री की सीधी आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
मध्य प्रदेश में लागू इस व्यवस्था के तहत वितरण केंद्रों से सरकारी राशन दुकानों तक सामग्री ले जाने का काम स्थानीय युवाओं को सौंपा गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना की मदद से लाभार्थियों को 7.5 मीट्रिक टन भार क्षमता वाले वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं। इस कार्यक्रम में शासन की ओर से बैंक ऋण पर तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान और सवा लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता दी जाती है। पड़ोसी राज्य में लगभग नौ सौ से एक हजार युवाओं को इस कार्य में लगाया गया है, जो हर महीने लगभग तीन हजार क्विंटल खाद्यान्न उचित मूल्य की दुकानों तक पहुँचाते हैं।
राशन के अवैध परिवहन और वितरण में होने वाले रिसाव को रोकने के लिए सभी अधिकृत वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण लगाए गए हैं। वाहनों के आवागमन और ठहराव पर स्टेट कमांड कंट्रोल सेंटर के जरिए सीधी निगरानी रखी जाती है। खाद्यान्न केंद्र से दुकान तक का रास्ता और समय पहले से तय रहता है, जिससे तय मार्ग से भटकने या अनावश्यक रुकने पर तुरंत सूचना मिल जाती है। हालांकि, इस व्यवस्था के बीच कुछ इलाकों में खाद्यान्न की अवैध बिक्री और वाहनों के दुरुपयोग की घटनाएं भी संज्ञान में आई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, राज्य में चावल उपार्जन और वितरण व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के लिए इस प्रारूप का विश्लेषण किया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो खाद्यान्न परिवहन सीधे युवाओं के माध्यम से कराया जाएगा, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलने की संभावना है।