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बालोद में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य, 15 नवंबर से 160 केंद्रों पर शुरू होगी खरीदी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Jsuhzjakauajjaiqja / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। जिले के 160 खरीदी केंद्रों पर 15 नवंबर से धान उपार्जन का काम शुरू किया जाएगा। उपार्जन केंद्रों पर धान की तौल कराने से पहले कृषक अथवा उनके पंजीकृत अधिकृत नामिनी का तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत अंगूठे के निशान, आंख की पुतली अथवा चेहरे के मिलान द्वारा पहचान पूरी की जाएगी। समिति के माध्यम से किसानों को सूचित किया जा रहा है कि इस पहचान प्रक्रिया के बिना समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल सकेगा।

प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सामान्य दशा में आधार से जुड़े वन टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी के जरिए सत्यापन कराने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। तकनीकी दिक्कतों अथवा मशीन में खराबी आने पर उपार्जन केंद्रों के प्रबंधक उच्चाधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक निर्देश प्राप्त करेंगे। अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद ही विशेष परिस्थितियों में वैकल्पिक मार्ग अपनाया जा सकेगा। इस संबंध में केंद्रों पर तैनात अमले को तकनीकी रूप से तैयार किया जा रहा है।

उपार्जन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से टोकन प्रणाली के नियमों में भी फेरबदल हुआ है। नई व्यवस्था के तहत टोकन जारी करते वक्त ही बेची जाने वाली उपज की मात्रा अंतिम रूप से तय कर दी जाएगी। यदि कोई किसान अपने जारी टोकन में निर्धारित मात्रा की तुलना में कम फसल बिक्री के लिए लाता है, तो बची हुई उपज को आगामी टोकन में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी कारण उपार्जन से जुड़े अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया है कि वे अपनी उपलब्ध उपज और तौल की योजना का सही आकलन करके ही पर्ची कटवाएं।

जिले के उपार्जन केंद्रों में किसानों की सहूलियत हेतु टोकन वितरण के दो अलग-अलग विकल्प तय किए गए हैं। कुल जारी होने वाले टोकनों में से 70 प्रतिशत कोटा ऑनलाइन माध्यम से आवंटित किया जाएगा, जबकि 30 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन माध्यम से समितियों द्वारा सीधे वितरित होगा। इस दोहरे प्रारूप से जहां दूरदराज रहने वाले किसान इंटरनेट व मोबाइल के जरिए अपना टोकन सुनिश्चित कर सकेंगे, वहीं समिति कार्यालय पहुंचने वाले काश्तकारों को भी पर्ची मिल सकेगी। फिलहाल सभी 160 उपार्जन केंद्रों में आवश्यक तैयारियां जारी हैं।

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