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माहवारी स्वच्छता को सुप्रीम कोर्ट ने माना मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण बात कही है। शीर्ष अदालत के अनुसार माहवारी स्वच्छता एक मौलिक अधिकार है। अदालत ने इस विषय को नागरिकों के मूलभूत अधिकारों से जुड़ा हुआ माना है। इस निर्देश के बाद माहवारी के दौरान मिलने वाली स्वच्छता सुविधाओं को संवैधानिक रूप से अनिवार्य बुनियादी अधिकार के रूप में देखा जा रहा है।