योजनारायपुर

छत्तीसगढ़ में पुनर्वास नीति और नक्सल प्रभावितों के प्रकरणों की समीक्षा, 109 स्थानों पर बनेंगे शहीद स्मारक

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Raunak005 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और पुनर्वासित लोगों से संबंधित लंबित मामलों के निराकरण के लिए विशेष अभियान संचालित करने के निर्देश दिए गए। जनसंपर्क विभाग और आधिकारिक ब्योरे के अनुसार, सहायता से वंचित रह गए प्रभावितों की पहचान कर उन्हें राहत पहुँचाने पर ज़ोर दिया गया है।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि माओवादी हिंसा में जान गँवाने वाले सुरक्षाकर्मियों के परिजनों को शत-प्रतिशत अनुकंपा नियुक्तियाँ प्रदान की जा चुकी हैं। उप मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रभावितों और पुनर्वासित व्यक्तियों की अद्यतन स्थिति दर्ज करने के लिए एसआईबी डैशबोर्ड को लगातार अपडेट रखा जाए। इसके अलावा राज्य गठन के पश्चात से अब तक बलिदान हुए जवानों और नागरिकों की स्मृति में 109 स्मारक बनाए जाने की योजना पर कार्य तेज़ करने को कहा गया। इन स्मारकों पर क्यूआर कोड लगाए जाएँगे, जिन्हें स्कैन करके बलिदानी और घटना का पूरा विवरण देखा जा सकेगा। शासकीय भवनों, चौराहों और शालाओं का नामकरण भी बलिदानियों के नाम पर किया जा रहा है।

बैठक में इलवद पंचायत योजना के तहत चुने गए 50 गाँवों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति जाँची गई। पुनर्वास नीति के प्रावधानों के अनुसार, जो ग्राम पंचायत अपने समूचे क्षेत्र के माओवादियों का आत्मसमर्पण कराकर स्वयं को माओवाद-मुक्त घोषित करती है, उसे 1 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएँ स्वीकृत की जाती हैं। इसके तहत अंदरूनी इलाकों में सड़क, विद्युत और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।

उप मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बस्तर संभाग में 12 से 14 अगस्त तक तीन दिवसीय तिरंगा यात्रा आयोजित की गई, जो 31 प्रमुख नक्सल घटना स्थलों से होकर गुज़री। यह यात्रा नारायणपुर से आरंभ होकर दंतेवाड़ा और बीजापुर होते हुए आवापल्ली, उसूर, कलगम तथा ताड़पाला के रास्ते कारिकुत्तलु पहाड़ी के नीचे संपन्न हुई। शासन के अनुसार बस्तर क्षेत्र के 92 ऐसे गाँव चिन्हित किए गए हैं, जहाँ स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पारस पोर्टल के ज़रिये नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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