रावघाट और कुरूद तक नई रेल सेवाओं की शुरुआत, मेमू ट्रेनों का संचालन शुरू

छत्तीसगढ़ में रेल तंत्र का विस्तार करते हुए 20 अक्टूबर को ताड़ोकी-रावघाट तथा रायपुर-कुरूद रेलखंडों पर मेमू यात्री रेल सेवाओं का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। इस वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक सात पर संपन्न हुआ।
जनसंपर्क विभाग और अन्य आधिकारिक विवरणों के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद पहली बार रेल सेवा अबूझमाड़ की दहलीज माने जाने वाले रावघाट तक पहुँची है। दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना के अंतर्गत 95 किलोमीटर लंबी पटरी बिछाने की प्रक्रिया का ऐतिहासिक संदर्भ काफी लंबा रहा है। ब्रिटिश काल में 1914 से 1918 के बीच बंगाल नागपुर रेलवे ने इस क्षेत्र का शुरुआती सर्वेक्षण कराया था। इसके उपरांत 1974 में तकनीकी एवं आर्थिक सर्वेक्षण का पहला चरण शुरू हुआ। परियोजना को 1998-99 के रेल बजट में शामिल करते हुए सैद्धांतिक मंज़ूरी दी गई थी। वर्ष 2005 से 2007 के दौरान रेलवे, स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड और राज्य शासन के बीच त्रिपक्षीय अनुबंध हुआ। वर्ष 2008 में निर्माण कार्य का जिम्मा रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपा गया तथा सुरक्षा व्यवस्था के लिए बीएसएफ और एसएसबी के जवानों को तैनात किया गया। नक्सल प्रभावित जंगलों और कठिन परिस्थितियों में निर्माण के दौरान हुए हमलों में तीन सुरक्षाकर्मियों और चार श्रमिकों की जान गई थी।
दूसरी ओर केन्द्री-धमतरी बड़ी लाइन परियोजना का काम कुरूद तक पूरा कर लिया गया है। वर्ष 2019 में 70 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज लाइन के लिए 550 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। कोरोना संकट के कारण यह कार्य अपने 2022 के लक्ष्य से पिछड़ गया था। रेलवे प्रशासन ने अब धमतरी स्टेशन तथा टर्मिनल निर्माण को फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस पूरे मार्ग पर रायपुर, केन्द्री, अभनपुर, कुरूद और धमतरी प्रमुख स्टेशन हैं, जबकि चटौद, सिर्री, सरसोंपुरी और सांकरा को पैसेंजर हॉल्ट का दर्जा दिया गया है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार रायपुर-कुरूद के बीच दो मेमू ट्रेनें तथा रायपुर-रावघाट के बीच एक ट्रेन संचालित की जाएगी। स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि इस सेवा से यात्रियों को बसों के 140 से 150 रुपये तक के महंगे किराए से राहत मिलेगी। साथ ही महुआ, इमली, हर्रा और कृषि उत्पादों को बड़े बाज़ारों तक ले जाने में सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त दल्लीराजहरा में कच्चा माल घटने के बाद भिलाई स्टील प्लांट को रावघाट से लौह अयस्क की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिहाज़ से भी यह रेल मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।