वन अधिकार और पेसा कानून के क्रियान्वयन पर टास्क फोर्स की पहली बैठक

छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम तथा पेसा कानून के मैदानी क्रियान्वयन को सुदृढ़ बनाने के लिए गठित टास्क फोर्स की प्रथम बैठक आयोजित की गई। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में संपन्न इस समीक्षा बैठक में वन क्षेत्रों में निवासरत पारंपरिक समुदायों के विधिक अधिकारों के संरक्षण और पारदर्शी व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रशासनिक समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के जरिए वनों में निवासरत लोगों के जीवन में बदलाव लाना प्रशासन का दायित्व है। जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्राम सभाओं के आजीविका संवर्धन के लिए राजधानी रायपुर में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला भी आयोजित की जा चुकी है।
अधिनियम के तहत दावों के परीक्षण के लिए त्रिस्तरीय वैधानिक ढांचा निर्धारित है। ग्राम सभा या वार्ड सभा द्वारा पारित प्रस्तावों को उपखंड स्तरीय समिति की अनुशंसा के बाद कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति को भेजा जाता है, जहां से अनुमोदन के उपरांत मान्यता पत्र निर्गत होते हैं। पूर्व में धमतरी ज़िले की नगरी नगर पंचायत के अंतर्गत तुमबहार, चुरियारा और नगरी वार्ड सभाओं को 4132.332 हेक्टेयर क्षेत्र के सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्रदान किए गए थे। इसके साथ ही उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित करही, जोरातराई, मासुलखोई, बरोली और बहीगांव की ग्राम सभाओं को 5553.25 हेक्टेयर क्षेत्र के अधिकार पत्र दिए गए थे।
विभागीय स्तर पर पट्टों के नियमों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई की जा रही है। सरगुजा क्षेत्र में महामाया पहाड़ से लगे बधियाचुआं और खैरबार इलाके में वन भूमि के अवैध अंतरण की पुष्टि के बाद जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने सात लोगों के पट्टे निरस्त कर बेदखली के निर्देश दिए थे। जांच दल को इस क्षेत्र में 468 अतिक्रमण भी मिले थे। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, राज्य शासन वैज्ञानिक, पारदर्शी और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ वनाधिकार कानूनों के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दे रहा है।