सरगुजा: कृषक उन्नति योजना से जुड़े किसान ने धान के बदले शुरू की अदरक की खेती

सरगुजा क्षेत्र में कृषक उन्नति योजना के सहयोग से एक किसान ने पारंपरिक धान की फसल को छोड़कर अदरक की पैदावार शुरू की है। आधिकारिक स्रोत के अनुसार इस व्यवस्था के तहत काश्तकार ने अपनी कृषि पद्धति में यह बदलाव किया है। इसके समानांतर सरगुजा ज़िले के ग्रामीण अंचलों में स्थानीय कृषक अपने सीमित संसाधनों के जरिए कृषि कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
ज़िले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत रेम्हला गांव के बुगुलपारा मोहल्ले में उरांव और पहाड़ी कोरवा समुदाय के काश्तकारों ने बिना किसी बिजली मोटर अथवा डीजल इंजन के खेतों की सिंचाई की व्यवस्था बनाई है। यहां के कृषक खिरखिरी पहाड़ से निकलने वाले बारहमासी खुकरापखना नाले का बहाव मोड़कर पानी खेतों तक लेकर आए हैं। यह जलधारा आगे जाकर चंदनई नदी में समाहित होती है।
ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में वे केवल मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहकर धान उगा पाते थे। नाले से खेतों की दूरी करीब दो किलोमीटर होने के कारण ग्रामीणों ने आपस में बैठक कर कच्ची नाली खोदने की योजना बनाई थी। फावड़ा, टोकनी और कुदाल के साथ पत्थरों व मुरम का उपयोग कर श्रमदान से इस नाली को तैयार किया गया। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान समय में करीब पांच से छह एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है तथा आगे बीस से बाईस एकड़ तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य है।
खेतों तक पानी उपलब्ध होने के उपरांत कृषक अब धान की उपज लेने के पश्चात सब्जियों का उत्पादन भी कर रहे हैं। यहां उपजाए गए आलू को लखनपुर तथा अंबिकापुर की मंडियों में बिक्री के लिए ले जाया जाता है। इस काम में कासा के सहयोग से चौपाल संस्था ने ग्रामीणों को राशन सामग्री उपलब्ध कराकर मदद पहुंचाई है।
भौगोलिक रूप से पहाड़ी ढलान की मौजूदगी के चलते नाले के जल को गुरुत्व बल की सहायता से खेतों तक पहुंचाने में सहायता मिली है। इस प्रकार सरगुजा में एक तरफ कृषक उन्नति योजना के माध्यम से काश्तकार अदरक जैसी फसल अपना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समुदाय अपने प्रयासों से दोहरी फसलें ले रहा है।