संपादकीय: आखिरी पंक्ति तक पहुँचे सुशासन

सुशासन की परीक्षा राजधानी के दफ्तरों में नहीं, बल्कि उस गाँव में होती है जहाँ एक नागरिक अपने हक़ की सेवा के लिए कतार में खड़ा है।
छत्तीसगढ़ में नागरिक-केंद्रित सेवाओं — एकीकृत सेवा केंद्रों से लेकर आवास और कल्याणकारी योजनाओं तक — पर बढ़ता ज़ोर एक सकारात्मक रुझान है। तकनीक और विकेंद्रीकरण इस प्रयास के उपयोगी औज़ार हैं, पर वे अपने-आप में लक्ष्य नहीं।
असली उपलब्धि तब है जब सेवाएँ समयबद्ध हों, प्रक्रिया सरल हो, और हर नागरिक को बिना सिफ़ारिश या बिचौलिए के उसका हक़ मिले। प्रशासन की सार्थकता इसी में है कि वह सबसे कमज़ोर नागरिक की आवाज़ को भी उतनी ही गंभीरता से सुने। यही जवाबदेह और संवेदनशील शासन की असली पहचान है।