संपादकीय

संपादकीय: सेवा सेतु — सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम

नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर न भटकना पड़े — यही किसी भी जवाबदेह प्रशासन की पहली कसौटी है। छत्तीसगढ़ में लोक सेवा केंद्रों को सेवा सेतु केंद्रों के रूप में पुनर्गठित कर 441 से अधिक सेवाओं को एक ही छत के नीचे लाने की पहल इसी दिशा में एक स्वागतयोग्य प्रयास है।

इसका असली मूल्य प्रमाण पत्रों की संख्या में नहीं, बल्कि उस समय और श्रम की बचत में है जो आम नागरिक को अब तक अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर में खर्च करना पड़ता था।

हालाँकि, ऐसी व्यवस्थाओं की सफलता केंद्रों की संख्या से नहीं, उनकी विश्वसनीयता और पहुँच से तय होती है। दूरदराज़ के गाँवों तक निर्बाध संपर्क, प्रशिक्षित कर्मचारी और शिकायत-निवारण की पारदर्शी प्रक्रिया इसकी असली परीक्षा होंगे। सेवा सेतु तभी सार्थक होगा जब वह आखिरी पंक्ति में खड़े नागरिक तक बिना किसी बिचौलिए के पहुँचे।