कवर्धा में किसानों को धान की सूखी सीधी बुआई तकनीक का दिया गया प्रशिक्षण

कवर्धा में किसानों को आधुनिक कृषि प्रणालियों और धान की उन्नत खेती से जोड़ने के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति और किसान क्राफ्ट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। जिले के अनेक कृषकों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेकर कृषि से जुड़ी विभिन्न बारीकियों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की।
सत्र के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने डायरेक्ट सीडिंग राइस यानी धान की सूखी सीधी बुआई पद्धति के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं को विस्तार से समझाया। विशेषज्ञों ने बताया कि जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए कई राज्यों में इस विधि का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक के उपयोग से न केवल जल और मानव श्रम की बचत होती है, बल्कि प्रति एकड़ फसल की उत्पादकता और किसानों की आमदनी में भी सुधार आता है।
प्रतिभागियों को पारंपरिक खेती और आधुनिक उच्च तकनीक के बीच का अंतर समझाने के लिए दृश्य माध्यमों और प्रोजेक्टर का सहारा लिया गया। इसके साथ ही उन्नत किस्म के बीजों, आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक विधियों के समुचित इस्तेमाल को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
आयोजन में किसान क्राफ्ट लिमिटेड के चेयरमैन रविंद्र अग्रवाल ने किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि देश में प्रति एकड़ औसत उपज में सुधार लाने और खेती की लागत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण दिया गया है। सीधी बुआई पद्धति सीमित लागत और कम पानी में अधिक उत्पादन का व्यावहारिक विकल्प प्रस्तुत करती है।
कार्यक्रम में मौजूद कृषक भागवत चंद्राकर ने बताया कि इस विधि को अपनाने से बुआई के दौरान श्रमिकों की निर्भरता घटेगी, जिससे खेती की कुल लागत में कमी आएगी। वहीं कृषक सोनी कुमार वर्मा ने कहा कि प्रशिक्षण के जरिए प्राकृतिक खेती और सीधी बुआई के तकनीकी पक्षों को समझने में सहायता मिली है।
आयोजकों के अनुसार, इस तरह की कार्यशालाओं से स्थानीय किसानों में उन्नत तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। सवाल-जवाब के माध्यम से किसानों ने अपनी व्यावहारिक शंकाओं का समाधान किया, जिसका लाभ आगामी फसल चक्र में देखने को मिलेगा।