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कोरबा: अनियमित मौसम से धान की फसल पर तना छेदक का हमला, 50 हेक्टेयर से अधिक रकबा प्रभावित

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Jacob / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

कोरबा ज़िले के ग्रामीण अंचलों में मौसम के बदलते मिज़ाज की वजह से धान की फसलों पर तना छेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। ज़िले के बरपाली और उसके आसपास के गांवों में 50 हेक्टेयर से ज़्यादा रकबे में खड़ी फसल इस कीट से प्रभावित हो चुकी है। इस समय धान के पौधे शुरुआती अवस्था में हैं और उनमें बालियां नहीं निकली हैं। बालियां आने से पूर्व ही कीटों का हमला होने से पौधों की सामान्य वृद्धि अवरुद्ध हो गई है।

कृषि विज्ञान के जानकारों के अनुसार, बरसात के ठीक बाद निकलने वाली तेज़ धूप और उसके साथ पैदा होने वाली नमी कीटों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। जब वातावरण का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और हवा में नमी 70 से 80 प्रतिशत के आसपास पहुंचती है, तो तना छेदक सबसे ज़्यादा सक्रिय हो जाते हैं। ज़िले में रुक-रुक कर हो रही बारिश और धूप के कारण खेतों में ऐसे ही हालात बने हुए हैं। रोपाई के 15 से 45 दिनों के बीच फसल पर इस कीट का जोखिम सबसे अधिक रहता है।

ज़िला कृषि विभाग के उपसंचालक डीपीएस कंवर ने बताया कि मौजूदा मौसमी परिस्थितियों में इस प्रकार के कीट तेज़ी से फैलते हैं, इसलिए फसलों का समय पर उपचार किया जाना अनिवार्य है। कृषि विभाग ने इस संदर्भ में किसानों के लिए परामर्श जारी किया है। विभाग ने कृषकों को कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर तैनात ग्रामीण कृषि विकास विस्तार अधिकारियों के निरंतर संपर्क में रहने को कहा है।

विभागीय जानकारी के मुताबिक, अन्य प्रजातियों की तुलना में बासमती किस्म के धान पर इस कीट का आक्रमण अधिक होता है। तना छेदक जुलाई से लेकर अक्टूबर तक फसलों को गंभीर क्षति पहुंचाता है। कीट के प्रभाव से पौधों की गोभ सूख जाती है और पत्तियों का रंग पीला पड़ने लगता है। इससे पौधों में फूल लगने और बालियों में दाने भरने से पहले ही फसल नष्ट होने की आशंका बढ़ जाती है। नुकसान से बचाव के लिए प्रभावित किसान खेतों में दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं।

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