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छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30: फार्मा, वस्त्र और आईटी को प्राथमिकता, आदिवासी अधिकारों का उल्लेख

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Yousuf R / Unsplash

छत्तीसगढ़ सरकार ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की है। शासन के अनुसार, इस नीति का केंद्रीय उद्देश्य राज्य को औद्योगिक विकास के एक सक्रिय केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिसे 'अमृत काल: छत्तीसगढ़' की व्यापक परिकल्पना से जोड़ा गया है। नीति का कार्यकाल 2024 से 2030 तक निर्धारित है।

शासन के अनुसार, नीति में फार्मास्युटिकल, वस्त्र उद्योग, कृषि-प्रसंस्करण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी — इन चार क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नीति का एक प्रमुख लक्ष्य राष्ट्रीय आय में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इसके अंतर्गत 'छत्तीसगढ़ स्टार्टअप पैकेज' का प्रावधान रखा गया है, जो नए उद्यमों को विशेष प्रोत्साहन देता है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती और बड़े पैमाने पर निवेश करने वाले उद्यमियों को अतिरिक्त सहायता एवं प्रोत्साहन मिलेंगे।

नीति में आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा का स्पष्ट उल्लेख है। यह उल्लेखनीय है क्योंकि राज्य की बड़ी जनजातीय आबादी और खनिज-आधारित औद्योगिक विस्तार के बीच अतीत में टकराव की स्थितियाँ उत्पन्न होती रही हैं।

जनवरी 2025 में ज़ेनोडो पर प्रकाशित एक शोध पत्र में शुभम भारद्वाज — अतिथि संकाय, शासकीय नवीन महाविद्यालय, वटगन, बलौदाबाज़ार-भाटापारा — और डॉ. संजय कुमार सिंह — सहायक प्राध्यापक, शासकीय पं. श्यामाचरण शुक्ल महाविद्यालय, रायपुर — ने इस नीति का ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों की औद्योगिक नीतियों से तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया है। शोध पत्र में छत्तीसगढ़ की पिछली औद्योगिक नीतियों से भी तुलना की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, नीति 2024-30 राज्य की औद्योगिक रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण विकास को दर्शाती है, किंतु इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन और लचीले प्रशासन पर निर्भर करेगी। शोध पत्र में SWOT विश्लेषण के माध्यम से नीति की शक्तियों के साथ-साथ संभावित कमज़ोरियों और बाह्य चुनौतियों की भी पहचान की गई है।

व्यापक संदर्भ में, टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ ने 2047 तक अपनी GSDP पंद्रह गुना करने और राज्य को सेवा एवं आईटी केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 को इसी दीर्घकालिक परिकल्पना का हिस्सा बताया जा रहा है। नीति के वास्तविक परिणाम और रोज़गार सृजन के आँकड़े आने वाले वर्षों में ही स्पष्ट हो सकेंगे।