छत्तीसगढ़: कम गंभीर नक्सल मामलों की विधिक समीक्षा के निर्देश, 50 गांवों को विकास राशि

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े कम गंभीर मामलों में निरुद्ध बंदियों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से विधिक समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आवश्यक वैधानिक जांच-पड़ताल के बाद पात्र प्रकरणों को वापस लेने की दिशा में पहल की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने पुलिस विभाग के साथ बैठक में राहत, पुनर्वास और अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए यह निर्देश जारी किए। शासन की योजना के तहत विधि विभाग के समन्वय से अभियोजन अधिकारियों तथा सरकारी वकीलों का एक विशेष दल गठित किया जाएगा। यह दल प्रकरणों का परीक्षण करेगा और पात्र आरोपियों को कानूनी मदद भी उपलब्ध कराएगा। प्रशासनिक स्तर पर इन मामलों में हुई प्रगति की हर हफ्ते जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में समीक्षा होगी।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि केवल वही प्रकरण इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे जिनमें किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 31 मार्च को राज्य को हथियारबंद नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया गया था।
इसके साथ ही राज्य शासन ने नक्सल प्रभाव से मुक्त होने का प्रस्ताव पारित करने वाले प्रत्येक गांव के लिए एक करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति देने का फैसला किया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ाने के लिए वर्तमान में ऐसे 50 गांवों को चिह्नित किया गया है। इनमें बीजापुर ज़िले के 20 गांव, सुकमा ज़िले के 20 गांव और नारायणपुर ज़िले के 10 गांव शामिल हैं।
गृह विभाग ने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया है कि आगामी 15 अगस्त के अवसर पर इन सभी नक्सल मुक्त घोषित गांवों में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जाए।