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छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026 के प्रारूप को दी मंजूरी, हर साल 5 लाख टन स्वच्छ ईंधन उत्पादन की क्षमता

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons (CC0)

छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने राज्य में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy) 2026’ के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह प्रशासनिक निर्णय लिया गया।

सरकारी ब्योरे के अनुसार, इस नीति के तहत खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों, पशुधन अपशिष्ट, गोबर और शहरों से निकलने वाले ठोस कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा। इन समस्त जैविक संसाधनों के प्रसंस्करण से कम्प्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी, जो पारंपरिक ईंधनों के बदले एक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनेगी।

राज्य सरकार के ‘अंजोर विजन-2047’ दस्तावेज के हवाले से अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में हर साल करीब 5 लाख टन कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की क्षमता मौजूद है। राज्य की अर्थव्यवस्था प्राथमिक तौर पर कृषि और पशुपालन पर टिकी है, जिससे भारी मात्रा में जैविक अपशिष्ट उपलब्ध रहता है। शासन का दावा है कि इन अवशेषों को नष्ट करने की जगह बायोगैस निर्माण में इस्तेमाल करने से राज्य हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करेगा।

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस नीति से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर बनने और किसानों की आमदनी में सुधार होने की उम्मीद है। किसान अपने कृषि अवशेषों और गोबर का आर्थिक उपयोग सुनिश्चित कर सकेंगे। साथ ही, बायोगैस संयंत्रों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियों में विस्तार होने की संभावना जताई गई है।

मंत्रिपरिषद की इसी बैठक में डिजिटल सुशासन, विभागीय योजनाओं के समन्वय और ग्रामीण सशक्तीकरण को गति देने के लिए ‘विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : छत्तीसगढ़’ के प्रारूप का भी अनुमोदन किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह योजना केंद्र सरकार के अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुरूप अमल में लाई जा रही है।

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