छत्तीसगढ़ में कम गंभीर नक्सल प्रकरणों की कानूनी समीक्षा के निर्देश, मुकदमों की वापसी पर होगा विचार

छत्तीसगढ़ शासन ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े कम गंभीर मामलों में जेलों में बंद लोगों की विधिक समीक्षा कराने का निर्देश जारी किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केवल उन्हीं प्रकरणों की पड़ताल कर अभियोजन वापसी पर विचार किया जाएगा जिनमें किसी भी नागरिक या सुरक्षा बल की जनहानि नहीं हुई है।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और विकास कार्यों को लेकर पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में यह दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विधि विभाग के समन्वय से अभियोजन अधिकारियों और शासकीय अधिवक्ताओं का एक संयुक्त दल गठित किया जाए। यह दल वैधानिक पड़ताल के बाद पात्र प्रकरणों को चिह्नित करेगा। इस प्रक्रिया की प्रगति का ब्योरा संबंधित ज़िला पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में हर सप्ताह परखा जाएगा। गृह मंत्री के अनुसार पुराने मामलों में करीब 1300 बंदी निरुद्ध हैं, जिनका विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकरण कर परीक्षण किया जा रहा है।
शासन ने पूर्व में प्रभावित रहे क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों को गति देने के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान भी तय किया है। इसके अंतर्गत उन पंचायतों को एक करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति दी जाएगी जिन्होंने स्वयं को नक्सल प्रभाव से मुक्त रखने का प्रस्ताव पारित किया है। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में ऐसे पचास गांवों को चिह्नित किया गया है, जिनमें सुकमा और बीजापुर ज़िलों से बीस-बीस तथा नारायणपुर ज़िले से दस गांव शामिल हैं। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मामले में न्यायालयीन राहत की प्रक्रिया शुरू करने से पहले जनहानि और अपराध की गंभीरता के तथ्यों की पूरी पड़ताल की जाएगी। जो प्रकरण नियमों के अनुरूप पात्र पाए जाएंगे, उनमें ही विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर अदालत के स्तर पर मुकदमे वापस लेने के वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।